सोहराब आलम/मोतिहारी। सुगौली प्रखंड की सुकुल पाकड़ पंचायत के धुमनी टोला में बाढ़ से बचाव के लिए हाल ही में कराए गए बांध की मरम्मत और मिट्टी भराई का कार्य विवादों के घेरे में आ गया है। इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि सरकारी धन का सही इस्तेमाल नहीं किया गया है जिसके चलते यह सुरक्षा दीवार ढकोसला साबित हो रही है।
मानकों की अनदेखी और भविष्य का खतरा
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बांध की ऊंचाई और चौड़ाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। बांध इतना कमजोर है कि वह बढ़ते जलस्तर का दबाव झेलने में पूरी तरह अक्षम प्रतीत हो रहा है। स्थानीय निवासी हृदया सहनी और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने बांध को केवल खानापूर्ति के रूप में बनाया है। यदि जल्द ही इस निर्माण कार्य में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले बरसात के दिनों में यह बांध बाढ़ के पानी के सामने रेत के महल की तरह ढह जाएगा।
राहत के नाम पर आशंका
सुकुल पाकड़ पंचायत का यह क्षेत्र प्रतिवर्ष बाढ़ की भयावह त्रासदी झेलता है। इस बार बांध के मरम्मत कार्य से ग्रामीणों को राहत की उम्मीद थी लेकिन निर्माण की खराब गुणवत्ता ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि अभी भारी बारिश का मुख्य दौर आना बाकी है। ऐसे में अधूरे और कमजोर बांध का होना न होने के बराबर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निर्माण की जांच करने और उसे सुरक्षित बनाने की मांग की है।
क्या प्रशासन जागेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बांध पहली ही परीक्षा में विफल हो गया, तो ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कैसे होगा? क्या स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस गुणवत्ताहीन निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर ग्रामीणों को एक बार फिर बाढ़ के पानी के बीच असुरक्षित छोड़ दिया जाएगा? वर्तमान में, ग्रामीणों का आक्रोश शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

