संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर का सपना देखने वाले हजारों परिवार आज भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों पहले आवेदन कर जमा-पूंजी और बैंक लोन के जरिए मकान बुक कराने वाले लोगों को अब तक घरों का कब्जा नहीं मिला है। इसके चलते कई परिवारों पर बैंक की EMI और मकान किराए का दोहरा बोझ पड़ रहा है। खासकर EWS श्रेणी के हितग्राही लंबे समय से कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
आधे से ज्यादा काम अब भी अधूरा
हाउसिंग फॉर ऑल मिशन के तहत भोपाल में 21 आवासीय प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए करीब 11 हजार 400 से ज्यादा मकान तैयार कर हितग्राहियों को देने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन करीब 9 साल बीत जाने के बाद भी सिर्फ 6 हजार 500 के आसपास मकान ही पूरे हो सके हैं। यानी आधे से ज्यादा काम अब भी अधूरा है। जानकारी के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत प्रोजेक्ट बीच में ही अटक गए हैं, जबकि बाकी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।
लोगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ी
मकान समय पर नहीं मिलने से हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। कई परिवार बैंक की EMI भी भर रहे हैं और साथ ही किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। सीमित आय वाले लोगों के लिए यह दोहरी मार भारी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि घर के सपने ने अब उन्हें कर्ज और तनाव के बोझ तले दबा दिया है। शहर के कई प्रोजेक्ट्स की हालत चिंताजनक बनी हुई है। अरेरा कॉलोनी 12 नंबर स्टॉप, गंगा नगर-श्याम नगर और राहुल नगर-2 जैसे प्रोजेक्ट तय समयसीमा से वर्षों पीछे चल रहे हैं। कई जगह इमारतों का ढांचा तो तैयार हो चुका है, लेकिन पानी, बिजली, सड़क और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं अब तक नहीं पहुंच पाई हैं। वहीं कुछ प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है।
पीड़ित हितग्राहियों ने लल्लूराम से कही ये बात
अरविंद बबेले ने बताया कि शुरू से ही निर्माण कार्य ठीक तरीके से नहीं हुआ। भवन की गुणवत्ता को लेकर भी कई शिकायतें हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में उन्होंने बैंक से लोन लेकर मकान बुक कराया था, लेकिन 5-6 साल बीत जाने के बाद भी मकान का कब्जा नहीं मिला है। एक ओर वे बैंक की किस्तें चुका रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किराए के मकान का खर्च भी उठा रहे हैं। कई बार नगर निगम अधिकारियों से आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली।
सीमित आय में परिवार चलाना मुश्किल
सर्वेश श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बुक कराया था। कुछ समय पहले उन्होंने लोन की पूरी राशि भी जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद अब तक मकान का कब्जा नहीं मिला है। उनका कहना है कि जब भी नगर निगम से संपर्क किया जाता है, हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर मकान का किराया देना पड़ रहा है, वहीं बच्चों की फीस और अन्य खर्चों का भी बोझ है। वे निजी शिक्षक हैं और सीमित आय में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उनका आरोप है कि आवेदन के बाद से अब तक उन्हें किसी प्रकार की लिखित जानकारी या स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है।
मुरलीधर रायकवाड ने बताया कि उन्होंने EWS श्रेणी के तहत मकान के लिए नगर निगम में 9 लाख रुपये जमा कर दिए हैं, लेकिन आज तक न तो मकान की रजिस्ट्री हो पाई है और न ही कब्जा मिला है। उनका कहना है कि नगर निगम की ओर से नवंबर 2025 तक मकान सौंपने का आश्वासन दिया गया था।
मेयर ने कही ये बात, विपक्ष ने घेरा
महापौर मालती राय ने कहा कि मैं प्रतिदिन लोगों की समस्याओं को सुनती हूं। जो भी व्यक्ति किसी समस्या से जूझ रहा है, उसके समाधान के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। जो आवास बंद रहे हैं, अलग-अलग शेड में बन रहे हैं उनका आवंटन हो रहा है, सबकी समय सीमा तय है। वहीं पूरे मामले पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है। सीनियर कांग्रेस नेता जेपी धनोतिया ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सब योजना जुमला बंद कर रह गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंदर भ्रष्टाचार हुआ है। लोग किराए के मकान में रह रहे हैं उनको अब तक कब्जा नहीं मिला है। पूरी योजना भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गई है।

