शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में होली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रंगों की धूम है, लेकिन नकली और केमिकल वाले रंगों की बिक्री ने लोगों की सेहत को खतरे में डाल दिया है। ऐसा नहीं कि यह पहली बार हो…हां लेकिन जो हम आपको बता रहे हैं यह पहली बार ही है कि सरकार हर बार की तरह इस बार भी सो रही है।
दरअसल, मध्य प्रदेश में मिलावट के लिए तो कई कानून, प्रावधान है। कड़ी सजा भी है, लेकिन बात अगर नकली, केमिकल युक्त और बेहद हानिकारक रंगों की जाए तो मामला जीरो…मतलब न कोई प्रावधान न कोई लैब, तो जांच की बात तो दूर दूर तक नहीं…जबकि हर साल लोग हजारों की संख्या में नकली या केमिकल युक्त हानिकारक रंग गुलाल के शिकार हो जाते हैं।
कई बीमारियों का खतरा
हां…बाजार में कुछ कंपनियां इस बात का दवा जरूर करती हैं कि उनके बेचे जाने वाले रंग और गुलाल प्राकृतिक हैं या आयुर्वेदिक औषधि युक्त है, लेकिन इन दावों का कोई प्रमाण पत्र कंपनियों के पास नहीं है। हानिकारक रंगों से त्वचा जलाने, एलर्जी और आंखों को नुकसान समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा होता है। आश्चर्य की बात तो यह भी है कि नकली और असली रंगों में पहचान कर पाना ग्राहक तो दूर दुकानदार और थोक मार्केट विक्रेताओं के भी बस की बात नहीं है।
कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला
इस मामले को लेकर कई जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत भी की, लेकिन अफसर है कि नीतिगत निर्णय ही न होने के कारण कैमरे के सामने कुछ भी बोले बताने से साफ इनकार हैं। रंगों की खतरनाक खेल को लेकर कांग्रेस पार्टी से पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि सालों से सत्ता में काबिज सरकार में सिर्फ दिखावा है। बड़े-बड़े दावों के अलावा कुछ नहीं है। सरकार को मामले पर तत्काल एक्शन लेना चाहिए। साथ ही साथ नीति बनाने और मिलावट से संबंधित कठोर प्रावधान भी करना चाहिए, लेकिन यह काम तो कांग्रेस सरकार में भी नहीं हुआ।
बीजेपी ने किया ये दावा
इधर बीजेपी ने दावा किया कि मामले पर भी संज्ञान लिया जाएगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि होली त्यौहार में स्वास्थ्य और पुलिस महकमा सुरक्षा के लिए मुस्तैद है। स्थानीय प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।

