राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। राजा भोज ने मध्य प्रदेश के धार जिले में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी। इसी महाविद्यालय को भोजशाला के नाम से जाना जाता है। राजा भोज मां सरस्वती के उपासक थे। इसी कारण उन्हें शिक्षा और साहित्य में अधिक रुचि थी। राजा भोज ने ही 1034 में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला का निर्माण किया और उसमें मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की। कहा जाता है जब इस महाविद्यालय को सरस्वती सदन कहा जाता था। भोजशाला को माता सरस्वती का प्राकट्य स्थान भी माना जाता है।

मान्यता के अनुसार, 1305 में मुस्लिम आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण किया और उसे नष्ट करने का प्रयास किया। 1401 में दिलावर खां ने भोजशाला के एक भाग में मस्जिद का निर्माण कराया। इसके बाद 1514 में महमूद शाह खिलजी ने भोजशाला के शेष बचे हिस्से पर मस्जिद का निर्माण करा दिया और कमाल मौलाना मकबरा की स्थापना की। इसी आधार पर भोजशाला को दरगाह होने का दावा किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: BIG BREAKING: MP हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, भोजशाला को घोषित किया मंदिर

1552 में मेदनी राय नाम के एक क्षत्रिय राजा ने हिंदू सैनिकों को इकट्ठा महमूद खिलजी को मार भगाया। अंग्रेजी शासनकाल में भी शोजशाला पर अत्याचार हुए। 1703 में मालवा पर मराठों का अधिकार हुआ। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1826 में मालवा पर अधिकार कर लिया। अंग्रेजों ने भी मंदिर पर आक्रमण किया। लॉर्ड कर्जन ने भोजशाला से देवी की मूर्ति को लेकर 1902 में इंग्लैंड में भेज दी। यह मूर्ति वर्तमान में लंदन के एक संग्रहालय में मौजूद है।

ये भी पढ़ें: मॉडल से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरि ने बांटी तलवारें: संतों पर लगाए गंभीर आरोप, बोलीं- लव जिहाद के खिलाफ बेटियों को सिखाएंगी आत्मरक्षा के गुर

मान्यता है कि मां सरस्वती का मंदिर होने के साथ भोजशाला संस्कृत अध्ययन केंद्र भी था। इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश के हजारों विद्वान आध्यात्म, आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कला, नाट्य, संगीत, योग, दर्शन, राजनीति, आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। यह क्षेत्र वायुयान, जलयान, स्वचालित यंत्रों के विषयों का भी अध्ययन केंद्र रहा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m