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SPECIAL STORY: तिरंगा के प्रति लोगों की बढ़ी दीवानगी, राष्ट्रध्वज बनाने वाली मध्य ‘भारत खादी संस्था’ के पास इस साल 5 गुना ज्यादा आए ऑर्डर, जानिए कैसे बनाए जाते हैं तिरंगे

कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। देश में राष्ट्रध्वज तिरंगा के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है, गणतंत्र दिवस के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ तिरंगा बनाने वाली ग्वालियर की मध्य भारत खादी संस्था के पास तिरंगे की मांग 5 गुना बढ़ गई है। मध्य भारत खादी संघ 24 जनवरी तक एक करोड़ 22 लाख रुपए कीमत के झंडे सप्लाई कर चुका है, जिसमे देश के 14 राज्यों में 22000 से ज्यादा झंडे सप्लाई किए। देश की सर्वश्रेष्ठ संस्था में तिरंगा झंडा तैयार करने में 6 दिन का समय लगता है। यहां 180 से लेकर 9000 रुपए तक कीमत के झंडे बनाए जाते हैं।

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पांच गुना ज्यादा बढ़ी मांग

देशभर में 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। संस्थानों से लेकर लोग अपने घरों में “तिरंगा” फहराते हैं। यही वजह है कि तिरंगे की मांग इन बार पांच गुना ज्यादा बढ़ गई है। लिहाजा राष्ट्रीय ध्वज निर्माण एजेंसियां बड़ी मात्रा में तिरंगा बनाने में जुटी हैं। ग्वालियर में बने तिरंगे की देशभर में मांग है। ग्वालियर में मध्यभारत खादी संघ की स्थापना 1925 में चरखा संघ के तौर पर हुई थी। 1956 में इसे मध्य भारत खादी संघ को आयोग का दर्जा मिला। वैसे तो सलाना 20 हज़ार तिरंगे बनाते है, लेकिन इस साल एक लाख 20 हजार तिरंगों का आर्डर मिला है। मध्य भारत खादी संघ 24 जनवरी तक एक करोड़ 22 लाख रुपए कीमत के झंडे सप्लाई कर चुका है, जिसमे देश के 14 राज्यों में 22000 से ज्यादा झंडे सप्लाई किए।

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हाथों से तैयार किया जाता है धागा

ग्वालियर में जो तिरंगे तैयार होते हैं, वो राष्ट्रीय ध्वज मानकों ISI के आधार पर होता है। तिरंगा झंडा के लिए धागा इसी केंद्र पर हाथों से तैयार किया जाता है। जिसमें ताना बाना की मजबूती से लेकर रंग तक राष्ट्रीय मानक के आधार पर रहता है। तिरंगे की सिलाई के दौरान कपड़े का मेजरमेंट, रंगों की मजबूती, सहित अन्य मानकों को जांचने के लिए मशीनों से टेस्टिंग की जाती है। करीब 20 से ज्यादा टेस्टिंग से गुजरने के बाद तिरंगा तैयार होता है। तिरंगा बनाने वाले भी खुश हैं कि इस साल तिरंगा को लेकर लोगों में भारी क्रेज बढ़ा है। साथ ही इस बात का गर्व महसूस होता है कि वो देश की शान तिरंगा बनाने का काम करते हैं। वहीं देशप्रेमी मानते हैं कि राष्ट्रध्वज देश की अस्मिता का परिचायक होता है। ध्वज से ही राष्ट्र का सम्मान होता है। बता दें कि देश में हुबली और ग्वालियर में ही ISI मार्क वाले खादी के तिरंगे बनाए जाते हैं।

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