कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। एमपी के ग्वालियर में अवैध खनन मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। डबरा के तत्कालीन एसडीएम और खनिज अधिकारियों के जवाब से नाराज हाईकोर्ट ने न सिर्फ एसडीएम के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी। बल्कि विवादित 16 खदानों में तत्काल प्रभाव से खनन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कलेक्टर से रिपोर्ट, सैटेलाइट इमेज, डीबीआर और रिकॉर्ड तलब करते हुए साफ कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी अपना कर्तव्य निभाने के बजाय गलत काम करने वालों की मदद कर रहे हैं।

दरअसल अवैध खनन मामले की सुनवाई के दौरान डबरा के तत्कालीन एसडीएम रूपेश रतन सिंघई और खनिज अधिकारी घनश्याम सिंह यादव ने कोर्ट में कहा कि वे कभी खदान क्षेत्र में नहीं गए और ई-चेक गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी नियमित रूप से नहीं देखते। यह जवाब सुनते ही हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने माना कि अधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया और डबरा के तत्कालीन एसडीएम के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी।

हाईकोर्ट ने विवादित 16 खदानों में तत्काल प्रभाव से खनन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को निर्देश दिए कि अवैध खनन रोकने के लिए की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट, ई-चेक गेट की सीसीटीवी फुटेज, डीबीआर और अन्य रिकॉर्ड अदालत में पेश किए जाएं। कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच बिना नए सीमांकन के आगे नहीं बढ़ेगी और संबंधित खदानों की सैटेलाइट इमेज भी प्रस्तुत की जाए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई खदानों पर गंभीर सवाल उठाए। एक मामले में कहा कि पहले से लीज मौजूद होने का तथ्य कोर्ट से छिपाया गया। कुछ खदानों में अवैध खनन की शिकायतों के बावजूद लीज का नवीनीकरण कैसे हुआ, इसका जवाब मांगा गया। कई मामलों में लीज नवीनीकरण की पूरी फाइल तलब की गई। वहीं एक मामले में राज्य सरकार ने खुद स्वीकार किया कि संबंधित व्यक्ति आदतन अवैध खनन करने वाला है और पहले भी दोषी पाया जा चुका है। ऐसे में हाईकोर्ट ने पांच अहम बिंदुओं पर अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया

– पहला- क्या अवैध खनन वास्तव में बंद हुआ?
– दूसरा- ई-चेक गेट के सीसीटीवी की निगरानी कौन करता है?
– तीसरा- 2017 का नोटिस नौ साल से लंबित क्यों है?
– चौथा- अब अवैध खनन और पर्यावरण संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
– पांचवां- कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ऐसा लगता है अधिकारी अपना कर्तव्य निभाने के बजाय गलत कार्य करने वालों की मदद कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राजस्व का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए प्रशासन को हर स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी। इधर प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव करते हुए कलेक्टर ने डबरा में नए एसडीएम की नियुक्ति कर दी है, जबकि वर्तमान एसडीएम को ग्वालियर भेज दिया गया है।फिलहाल हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अवैध खनन पर प्रशासन की कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही दोनों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अब अगली सुनवाई में प्रशासन को अदालत के सामने पूरे दस्तावेजों और रिपोर्ट के साथ जवाब देना होगा।

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