चंकी बाजपेयी, इंदौर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ब्लैकमेलिंग के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों के नाम और जोड़े हैं। जिसमें रिशु चौधरी और पुलिसकर्मी विनोद शर्मा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि विनोद चौधरी मुख्य आरोपी अलका दीक्षित के संपर्क में बना हुआ था और इस ब्लैकमेलिंग अभियान को मिशन के तौर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल इसमें संभावना व्यक्त की गई की और भी आरोपी सामने आ सकते हैं। अभी तक सात लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। जिनकी 25 में तक पुलिस रिमांड ली गई है।

डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े हुए हितेंन ठाकुर ने ब्लैकमेलिंग सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज करवाया था। तभी से क्राइम ब्रांच लगातार जांच पड़ताल में जुटी थी। जिसमें अलका दीक्षित और उसके बेटे जयदीप दीक्षित को गिरफ्तार किया गया था। जांच पड़ताल के दौरान उज्जैन में रहने वाले जितेंद्र पुरोहित को भी पकड़ा गया था।

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साथ ही इस ब्लैकमेलिंग में कारोबार को पार्टनरशिप के रूप में बताया गया था और पीथमपुर के रहने वाले लखन सिंह नामक व्यक्ति से अलका चौधरी ने फरियादी ठाकुर की मुलाकात करवाई थी। लेकिन इन सब के मंसूबों को लेकर फरियादी को किसी वारदात की बदबू आने लगी। इसके बाद उसने तुरंत क्राइम ब्रांच में शिकायत की।

शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने मामले में जांच पड़ताल शुरू की जिसमें एक करोड रुपए की ब्लैकमेलिंग की बात सामने आई। इस आधार पर शिकायत भी दर्ज हुई थी। मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था जो सागर के रहने वाली रिशु चौधरी और पुलिसकर्मी विनोद शर्मा संपर्क में थे। 

मामले का खुलासा होने के बाद अब उन्हें भी आरोपी बना दिया गया है। इस मामले में अभी तक कुल सात आरोपी बन बन चुके हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिसकर्मी विनोद लगातार अलका दीक्षित के संपर्क में था। वह पूरी प्लानिंग को मिशन के तौर पर संचालित कर रहा था ताकि ब्लैकमेलिंग से मिलने वाले रुपए का हिस्सा कर सभी आपस में बांट लेते। पुलिस के मुताबिक अभी और भी आरोपी बनने की संभावना है। उनके मोबाइल फोन की जांच पड़ताल की जा रही है।

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