चंकी बाजपेयी, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक बार फिर हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक बड़े कारोबारी की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया है। इस मामले के तार भोपाल से भी जुड़े हैं, जहां से चर्चित आरोपी श्वेता जैन को हिरासत में लिया गया है। वहीं, खाकी भी इस मामले में दागदार होती नजर आ रही है; क्राइम ब्रांच एक पुलिस आरक्षक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार शहर के व्यापारी हितेन सिंह ठाकुर ने क्राइम ब्रांच में ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। DCP राजेश त्रिपाठी ने बताया कि पीड़ित पहले शराब के कारोबार से जुड़ा था लेकिन कुछ समय बाद वह बिल्डशिप का काम करने लगा। नए कारोबार के साथ उसकी पहचान अलका दीक्षित नामक महिला से हुई थी। महिला ने व्यापार के सिलसिले में पीड़ित की मुलाकात पीथमपुर में रहने वाले लाखन सिंह से करवाई। दोनों के बीच बराबर हिस्सेदारी के साथ व्यापारिक समझौते भी हुए।
ऐसे हुआ साजिश का पर्दाफाश
कारोबार की आड़ में इस गैंग का मकसद कारोबारी को अपने जाल में फंसाकर मोटी रकम ऐंठना था। हालांकि एग्रीमेंट और कागजी कार्रवाई के दौरान ही फरियादी हितेन सिंह ठाकुर को भनक लग गई कि यह पूरा ग्रुप आपराधिक प्रवृत्ति का है और उन्हें किसी झूठे केस या गंभीर आपराधिक मामले में फंसाकर ब्लैकमेल करने की गहरी साजिश रच रहा है।अंदरूनी खतरे को भांपते हुए हितेन सिंह ने शहर के अन्य शराब कारोबारियों से संपर्क साधा और उनकी मदद से सीधे क्राइम ब्रांच में मामले की शिकायत कर दी।
भोपाल से श्वेता जैन की गिरफ्तारी
शिकायत मिलते ही हरकत में आई क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाकर मुख्य आरोपी अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप दीक्षित और पीथमपुर के लाखन सिंह को धर दबोचा। आरोपियों के मोबाइल खंगालने पर पुलिस के हाथ कुछ संदिग्ध नंबर लगे जिनकी कड़ियां भोपाल से जुड़ी थीं। मोबाइल नंबर ट्रेसिंग के आधार पर पुलिस ने भोपाल से श्वेता जैन को गिरफ्तार किया है। बता दें कि ये वहीं श्वेता जैन जिस पर पूर्व में भी कई गंभीर मामले दर्ज हो चुके हैं। श्वेता जैन को इंदौर लाकर पूछताछ करने की पूरी तैयारी है।
मामले में ‘खाकी’ कनेक्शन
इसके अलावा आरोपियों की कॉल डिटेल में इंदौर पुलिस के आरक्षक विनोद शर्मा का नंबर भी सामने आया है। आरोपियों से आरक्षक की लगातार बातचीत हो रही थी। फिलहाल पुलिस आरक्षक विनोद शर्मा को हिरासत में लेकर यह पता लगा रही है कि वह इस गैंग से कब से जुड़ा था और ब्लैकमेलिंग के खेल में उसकी क्या भूमिका थी।
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हनीट्रैप के एंगल से भी हो रही जांच
डीसीपी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि मोबाइल डेटा की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच में श्वेता जैन और आरक्षक विनोद शर्मा के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलते ही उन्हें भी मामले में विधिवत आरोपी बनाया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामला ब्लैकमेलिंग के साथ हनीट्रैप का भी हो सकता है, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है अगर अन्य आरोपों की पुष्टि होती है तो उनके हिसाब से भी कार्रवाई की जाएगी।

