कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के रहवासी इलाकों में बिना फायर सेफ्टी नियमों के चल रहे गोदामों, फैक्ट्रियों और व्यावसायिक भवनों पर अब हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन, नगरीय प्रशासन विभाग, जबलपुर कलेक्टर और जबलपुर नगर निगम को नोटिस जारी कर कड़ा जवाब तलब किया है।
दरअसल, जबलपुर शहर के तमाम रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। तंग गलियों और आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े-बड़े गोदाम, दुकानें और फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनके पास न तो वैध फायर एनओसी (NOC) है और न ही अग्नि सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम हैं। याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट में पुरजोर दलीलें पेश करते हुए कहा कि ये अवैध और असुरक्षित प्रतिष्ठान, इस भीषण गर्मी के मौसम में किसी बड़ी अग्नि दुर्घटना को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।
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कोर्ट को यह भी याद दिलाया गया कि पूर्व में बिना फायर एनओसी के चल रहे संस्थानों में गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिससे जन-धन की भारी हानि हुई थी। इसके बावजूद प्रशासन अब तक नींद से नहीं जागा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अब शासन और स्थानीय प्रशासन पर शिकंजा कसते हुए नोटिस जारी किया है और पूछा है कि आबादी वाले क्षेत्रों में बिना सुरक्षा मानकों के ये प्रतिष्ठान कैसे चल रहे हैं?
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कोर्ट में दी गई ये दलीलें
वकील दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट में दलील रखते हुए कहा कि, जबलपुर शहर के जो मुख्य रहवासी इलाके हैं, वहां बिना किसी फायर एनओसी और बिना सुरक्षा मानकों के बड़े-बड़े गोदाम, व्यावसायिक भवन और फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। हमने माननीय हाईकोर्ट के समक्ष यह बात रखी है कि भीषण गर्मी के इस दौर में यह स्थिति बेहद खतरनाक है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पिछली घटनाओं से भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया। अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद जबलपुर नगर निगम और जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से कब जागता है और इन जानलेवा अवैध गोदामों और भवनों पर क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।


