कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्यप्रदेश में अजब-गजब मामलों की कमी नहीं है, लेकिन इस बार स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा कारनामा कर दिया जिसने सबको हैरान कर दिया। मामला ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल का है, जहां कर्मचारियों की सैलरी अटकने के पीछे वजह बनी एक ऐसी तारीख, जो कैलेंडर में होती ही नहीं। जी हां, तारीख थी 31 जून। आखिर कैसे एक गलत तारीख ने अस्पताल में हड़ताल करा दी.

चौंकाने वाली गलती

दरअसल मामला जिला अस्पताल मुरार में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से जुड़ा है। कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने और अन्य समस्याओं को लेकर काम बंद कर दिया। अचानक हुई इस हड़ताल से अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो गईं और मरीजों के साथ उनके अटेंडर्स को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि कुछ घंटों बाद सिविल सर्जन द्वारा जल्द वेतन दिलाने का आश्वासन मिलने पर हड़ताल खत्म हो गई। लेकिन जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई तो एक चौंकाने वाली गलती सामने आई। अस्पताल में सफाई व्यवस्था संभाल रही आउटसोर्स कंपनी राज सिक्योरिटी फोर्स का कहना है कि उनका टेंडर 31 मार्च 2026 को खत्म हो चुका था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ना तो नया टेंडर जारी किया और ना ही कंपनी का अनुबंध बढ़ाने की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की। 

आखिर 31 जून की तारीख आती कहां है?

कंपनी के अनुसार 4 अप्रैल को सिविल सर्जन को पत्र लिखकर कर्मचारियों के हित में भुगतान और नए अनुबंध को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई थी। इसके जवाब में 5 मई को व्हाट्सऐप के जरिए एक पत्र भेजा गया,जिसमें कंपनी की अनुबंध अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 जून 2026 तक बढ़ाने की बात लिखी गई थी, अब सवाल यही है कि आखिर 31 जून की तारीख आती कहां है? क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर में जून महीने में सिर्फ 30 दिन ही होते हैं। यही वजह है कि कंपनी ने 6 मई को जवाबी पत्र भेजकर इस अनुबंध को मानने से इनकार कर दिया। आउटसोर्स कम्पनी राज सिक्युरिटी फोर्स का कहना है कि सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में या तो मानवीय भूल हुई है या फिर जानबूझकर ऐसी तारीख डाली गई। नियमों के मुताबिक ऐसी स्थिति में अनुबंध स्वतः समाप्त माना जा सकता है।

विवाद के चलते कर्मचारियों का भुगतान अटक गया

कंपनी का यह भी आरोप है कि पत्र न तो आधिकारिक मेल आईडी से भेजा गया और न ही डाक के जरिए। इसी विवाद के चलते कर्मचारियों का भुगतान अटक गया और उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। वहीं जब इस पूरे मामले में सिविल सर्जन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

प्रशासनिक लापरवाही ने अस्पताल की व्यवस्था बिगाड़ दी

बहरहाल अब सवाल सिर्फ एक गलत तारीख का नहीं है, बल्कि उन कर्मचारियों का है जिनकी मेहनत की कमाई समय पर नहीं मिल पा रही। एक प्रशासनिक लापरवाही ने अस्पताल की व्यवस्था बिगाड़ दी और सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को उठानी पड़ी,फिलहाल कर्मचारी यही मांग कर रहे हैं कि उनका वेतन समय पर मिले ताकि उनका घर-परिवार चल सके।

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