हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा सरकार और नगर निगम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया कि भागीरथपुरा की घटना कोई सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि पूरे शहर की जल व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है।

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि जब भागीरथपुरा में लोगों की जान जा रही थी, तब कांग्रेस ने सिर्फ राजनीति नहीं की बल्कि आंदोलन, जनजागरूकता अभियान और लगातार जनदबाव बनाकर इस मुद्दे को प्रदेश और देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी स्वयं पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे, मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंतिम संस्कार तक में परिवारों के साथ खड़े होकर जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा की घटना ने पूरे इंदौर की जल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसलिए कांग्रेस ने स्वतंत्र रूप से पानी की जांच कराने का निर्णय लिया।

98 प्रतिशत नमूने दूषित

कांग्रेस के अनुसार लाइव लैब और अन्य प्रमाणित प्रयोगशालाओं के माध्यम से 26 दिनों तक लगातार पानी के नमूने एकत्र किए गए। कुछ नमूनों की जांच दिल्ली की लैब में भी कराई गई। हर सैंपल की जियो-टैगिंग, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई ताकि किसी प्रकार का विवाद न हो। पटवारी ने दावा किया कि 3 फरवरी से 28 फरवरी के बीच इंदौर के सात विधानसभा क्षेत्रों के 29 वार्डों से 240 पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से 98 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए। रिपोर्ट में क्लोराइड और सल्फेट जैसे तत्वों की अधिक मात्रा सामने आई, जो डायरिया, बुखार और पेट संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इतना ही नहीं, कुछ नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया भी पाया गया, जो इंसानों और जानवरों के मल में पाया जाता है और सीधे तौर पर सीवरेज मिश्रण की ओर संकेत करता है।

भागीरथपुरा कांड की दिलाई याद

भागीरथपुरा कांड की याद दिलाते हुए पटवारी ने कहा कि उस क्षेत्र में लोगों को नलों से साफ पानी नहीं बल्कि बीमारी और मौत देने वाला पानी मिला। कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और सैकड़ों लोग अस्पतालों तक पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा की “ट्रिपल इंजन सरकार” को “ट्रिपल अराजकता” बताते हुए कहा कि सांसद भाजपा का, महापौर भाजपा का, सरकार भाजपा की और निगम प्रशासन भी भाजपा के नियंत्रण में है, फिर भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

PCC चीफ ने दी ये चुनौती

उन्होंने सवाल किया कि हजारों करोड़ रुपये पानी और जल परियोजनाओं पर खर्च होने के बावजूद आखिर लोगों के घरों तक सीवरेज मिला पानी कैसे पहुंच रहा है? पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले उनके हाथ कटे हुए दिखाई देते थे, अब इस मुद्दे पर उनकी जुबान भी कट गई है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस द्वारा पेश की गई रिपोर्ट गलत है तो महापौर उन्हें अदालत में ले जाएं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट भारत सरकार से प्रमाणित उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं की जांच पर आधारित है और इसकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।

इंदौर सांसद और जनप्रतिनिधियों पर भी खड़े किए सवाल

उन्होंने इंदौर के सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि शहर में लगातार गंभीर मुद्दे सामने आ रहे हैं लेकिन जनता की आवाज उठाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे के निस्तारण का मुद्दा हो, भूमि अधिग्रहण में मुआवजे का मामला हो या फिर दूषित पानी से लोगों की जान जाने का सवाल, हर मोर्चे पर जनता खुद को अकेला महसूस कर रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे इंदौर का व्यापक जल ऑडिट कराया जाए, पुरानी पाइप लाइनों की तकनीकी जांच हो, सीवरेज और पेयजल लाइनों के क्रॉस कनेक्शन की पहचान की जाए और नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

इंदौर की जनता पूछ रही सवाल

पटवारी ने कहा कि यदि कांग्रेस की सरकार बनती है तो जल संकट और भागीरथपुरा जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर क्या जल गुणवत्ता के मामले में गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है? भागीरथपुरा की त्रासदी ने जो चेतावनी दी थी, क्या प्रशासन ने उससे कोई सबक लिया या फिर शहर के लाखों लोग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं? यही सवाल अब इंदौर की जनता भी पूछ रही है।

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