शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद सियासी सरगर्मी चरम पर है। कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रखने और किसी भी तरह की सेंधमारी से बचाने के लिए पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। पार्टी अपने विधायकों को बांधे रखने के लिए आज दिनभर ‘लंच पॉलिटिक्स’ और ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का सहारा ले रही है, जिसमें मतदान की रणनीति से लेकर विधायकों की बाड़ेबंदी (शिफ्टिंग) पर अंतिम मुहर लगेगी।
नामांकन के तुरंत बाद शुरू हुई लंच पॉलिटिक्स
आज सुबह कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के विधानसभा में नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद सभी कांग्रेस विधायकों को सीधे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) पहुंचने के निर्देश दिए गए। दोपहर 1:00 बजे प्रदेश कार्यालय में सभी विधायकों के लिए एक विशेष लंच (दोपहर का भोजन) आयोजित किया गया। इस लंच के साथ ही एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक में राज्यसभा चुनाव के दौरान होने वाली वोटिंग को लेकर बारीक रणनीति तैयार की जा रही है और हर विधायक को उनकी जिम्मेदारी समझाई जा रही है।
शाम को ‘डिनर डिप्लोमेसी’: शिफ्टिंग पर लिया जाएगा अंतिम फैसला
लंच पॉलिटिक्स के बाद कांग्रेस का यह सियासी घटनाक्रम शाम को भी जारी रहेगा। विधायकों को एकजुट रखने की कड़ी में अब ‘डिनर डिप्लोमेसी’ की तैयारी है। शाम को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सभी कांग्रेस विधायकों को अपने निवास पर डिनर (रात के खाने) पर आमंत्रित किया है। सूत्रों के मुताबिक, इस डिनर मीटिंग के दौरान विधायकों की सुरक्षा और क्रॉस वोटिंग के खतरे को देखते हुए उन्हें दूसरे राज्यों (जैसे कांग्रेस शासित या सुरक्षित ठिकानों) में शिफ्ट करने को लेकर फाइनल रणनीति बनेगी। इस बैठक में तय हो जाएगा कि विधायकों को भोपाल में ही रखा जाना है या तुरंत कहीं और रवाना किया जाएगा।
एकजुटता दिखाने की कोशिश, संशय बरकरार
बीजेपी के आक्रामक रुख और तीखे बयानों के बीच कांग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं। हालांकि, ऐन वक्त पर पार्टी के भीतर से हो रहे इस्तीफों और असंतोष ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि लंच से लेकर डिनर तक, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपने विधायकों की साये की तरह निगरानी कर रहा है।


