अनिल मालवीय, सीहोर। इच्छावर जनपद शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले खामखेड़ा प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल तथा आंगनबाड़ी केंद्र की ज़मीनी हकीकत शिक्षा और महिला बाल विकास विभाग के दावों की पोल खोल रही है। सरकारी दावों के विपरीत यहाँ बच्चों के लिए आने वाले मध्याह्न भोजन में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती जा रही है।

​हाल ही में जब खामखेड़ा प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल से अव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। बच्चों को मिलने वाला मध्याह्न भोजन तय मीनू के हिसाब से कोसों दूर मिला। बच्चों की थाली में सब्जी नदारद थी और मासूम केवल खीर के साथ पूरी खाने को मजबूर थे। जब इस संबंध में बच्चों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि स्कूल में अक्सर सब्जी नहीं बनाई जाती है और उन्हें इसी तरह का अधूरा भोजन थमा दिया जाता है।

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​स्कूल के साथ-साथ खामखेड़ा आंगनबाड़ी केंद्र के हालात भी बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस आंगनबाड़ी में 195 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान मौके पर महज 3 बच्चे ही उपस्थित मिले। स्थिति यह है कि यहाँ आने वाले मासूमों को न तो समय पर मध्याह्न भोजन मिल रहा है और न ही पौष्टिक दलिया या सत्तू का वितरण किया जा रहा है।

​मामले को लेकर जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुशीला से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि बच्चों के लंच का समय दोपहर 12 बजे का तय है, लेकिन खाना माध्यमिक स्कूल से बनकर 1 से 2 बजे के बीच आता है। देरी के कारण कई बार मासूम बच्चे बिना कुछ खाए ही घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि जो मध्याह्न भोजन आंगनबाड़ी में आता है, वह माध्यमिक स्कूल से बनकर आता है और उस स्व-सहायता समूह को स्वयं माध्यमिक स्कूल के हेडमास्टर संचालित करते हैं। कई बार मध्याह्न भोजन नहीं बनता है, जिसके चलते बच्चों को भूखे पेट ही घर जाना पड़ा।

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​आंगनबाड़ी केंद्र में वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही का एक और सबसे गंभीर मामला सामने आया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ही बेटी अर्चना, उसी केंद्र में सहायिका के पद पर पदस्थ है। बताते हैं कि सहायिका अर्चना सीहोर में निवास करती है और कभी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं आती, लेकिन हर महीने नियमित रूप से अपना वेतन उठा रही है।

​सरकारी योजनाओं और नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। देखना होगा कि इस तरह की घोर अनियमितता पर जिम्मेदार अधिकारी क्या कड़ा रुख अपनाते हैं। मामले में विभाग का कहना है कि समय पर पोषण आहार दिया जाता है।

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