दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। शहर के कालिकानगर निवासी 73 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका दीपाली शर्मा के साथ लिफ्ट लगाने के नाम पर 4 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। एडवांस राशि लेने के बावजूद कंपनी ने न तो काम पूरा किया और न ही पैसे वापस लौटाए। परेशान होकर बुजुर्ग महिला अपने दिव्यांग बेटे को व्हीलचेयर पर लेकर कोतवाली थाने पहुंचीं, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
बारिश के पानी से बचने के लिए बनवाया था पहला माला
पीड़िता दीपाली शर्मा ने बताया कि वे अपने दिव्यांग बेटे के साथ घर पर रहती हैं। बारिश के दिनों में घर में पानी भर जाने के कारण बेटे को बाहर ले जाने में काफी दिक्कत होती थी। इसी परेशानी से निजात पाने के लिए उन्होंने घर की पहली मंजिल बनवाकर उसमें लिफ्ट लगवाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने भोपाल की ‘सेल्को लिफ्ट एंड एक्सीलेटर’ कंपनी के संचालक मनीष मिश्रा से संपर्क किया था।
₹7 लाख में तय हुआ था सौदा, 3 किस्तों में दिए ₹4 लाख
दोनों पक्षों के बीच कुल 7 लाख रुपये में एग्रीमेंट हुआ था। इसके तहत दीपाली शर्मा ने तीन किस्तों में पैसे दिए। 1 अक्टूबर 2025 पहली किस्त ₹1 लाख, 31 अक्टूबर 2025 दूसरी किस्त ₹2 लाख ओर 24 जून 2026 को तीसरी किस्त ₹1 लाख दी। कंपनी ने वादा किया था कि मकान का निर्माण और पुताई पूरी होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, मकान बनकर तैयार होने के बाद भी कंपनी ने काम करने से साफ इनकार कर दिया और पैसे लौटाने में भी आनाकानी करने लगी।
पुलिस की कार्रवाई और ठेकेदार का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस के एसआई वंशज श्रीवास्तव ने बताया कि बुजुर्ग महिला की शिकायत पर तुरंत कंपनी संचालक से संपर्क किया गया। पुलिस ने पीड़िता को उनकी राशि वापस दिलाने का प्रयास शुरू करते हुए आरोपी मनीष मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वहीं मामले में ठेकेदार मनीष मिश्रा का कहना है कि सिविल वर्क की वजह से देरी हुई थी और मकान 15 दिन पहले ही तैयार हुआ है। उसने अपनी गलती मानते हुए कहा, “मैं 10 दिनों के भीतर लिफ्ट लगाने या पीड़िता के पैसे वापस करने के लिए तैयार हूँ। मेरे पास फिलहाल इतनी बड़ी रकम एक साथ नहीं है।”
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