हेमंत शर्मा, इंदौर। साधारण शेयरिंग ई-रिक्शा में बैठकर सफर करने वाला एक शातिर चोर करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला। इंदौर पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि अंतरराज्यीय चोरी गिरोह का सरगना मेहबूब हुसैनी (53) पिछले करीब 18 साल से अपने परिवार के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देता रहा। चोरी की कमाई से उसने उत्तर प्रदेश के बिजनौर में करीब दो करोड़ रुपये का आलीशान बंगला भी खड़ा कर लिया। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी वर्ष 2008 से इंदौर में सक्रिय था। इस दौरान उसने इंदौर के अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों में वारदातों को अंजाम दिया। उसके खिलाफ अब तक करीब 40 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चोरी के इस नेटवर्क में उसका पूरा परिवार शामिल था और सभी मिलकर योजनाबद्ध तरीके से वारदात करते थे।
ई-रिक्शा बनता था चोरी का अड्डा
पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी शेयरिंग ई-रिक्शा में आम यात्री बनकर बैठता था। सफर के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बाहर से आए यात्रियों को निशाना बनाकर उनके बैग, पर्स, नकदी और जेवरात पार कर देता था। वारदात इतनी सफाई से की जाती थी कि पीड़ित को काफी देर बाद चोरी का पता चलता था।
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महाराष्ट्र से आए परिवार को बनाया शिकार
हाल ही में महाराष्ट्र से अपनी बेटी को इंदौर में ससुराल छोड़ने आए एक परिवार को भी इसी गिरोह ने निशाना बनाया। रेलवे स्टेशन से ई-रिक्शा में बैठने के दौरान सूटकेस से करीब 12 तोला सोने के जेवर चोरी कर लिए गए। शिकायत के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई। कार्रवाई के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 20 लाख रुपये का चोरी का माल भी बरामद किया गया।
गिरफ्तारी के बाद खुला करोड़ों की संपत्ति का राज
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब उसकी तलाश में उत्तर प्रदेश के बिजनौर पहुंची तो वहां उसका आलीशान बंगला देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में सामने आया कि चोरी की कमाई से ही यह बंगला तैयार किया गया था। पुलिस अब आरोपी की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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इंदौर में 11, कई राज्यों में 40 केस
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ केवल इंदौर में ही 11 चोरी के मामले दर्ज हैं, जबकि उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में कुल 40 से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए गए हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में कई और वारदातों का खुलासा हो सकता है।
अब नेटवर्क की पूरी जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, चोरी का माल कहां खपाया जाता था और पिछले 18 वर्षों में इस गैंग ने कितनी बड़ी वारदातों को अंजाम दिया। जांच एजेंसियां अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर गिरोह के आपराधिक रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।
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