मुकेश मेहता, सीहोर (बुधनी)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में अपने हक और बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई-लिखाई छोड़कर सड़कों पर उतरे आईटीआई के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। चकल्दी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था के विद्यार्थियों ने निजीकरण और छात्रावास की बदहाली के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका है। कड़ाके की धूप और थकान की परवाह किए बिना छात्र 3 दिनों में 80 किलोमीटर से अधिक का सफर पैदल तय करके सीहोर स्थित कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था में सुधार की कड़क मांग की।

3 दिन की पदयात्रा: परम फाउंडेशन को ITI सौंपने पर भड़का आक्रोश

छात्र-छात्राओं का यह गुस्सा केवल अव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे सरकारी संस्थान के निजीकरण का बड़ा सस्पेंस भी शामिल है। चकल्दी आईटीआई को परम फाउंडेशन नाम के निजी संस्था को सौंपे जाने की प्रक्रिया की खबरें सामने आते ही विद्यार्थियों ने मोर्चा खोल दिया।

तीन दिनों तक चकल्दी से लेकर सीहोर तक 80 KM की लंबी दूरी पैदल नापते हुए सैकड़ों विद्यार्थी कलेक्टोरेट पहुंचे, जिससे रास्ते भर यह आंदोलन चर्चा का विषय बना रहा।

कैंटीन से लेकर स्कॉलरशिप तक धांधली! छात्रों ने उठाए कड़े सवाल

छात्रों ने आरोप लगाया कि छात्रावास में न तो कैंटीन के मेन्यू का पालन हो रहा है और न ही समय पर स्कॉलरशिप मिल रही है। स्टेशनरी और स्पोर्ट्स सुविधाओं में भारी धांधली की जा रही है। स्टोर रूम से छात्रों को समय पर जरूरी सामग्री तक उपलब्ध नहीं कराई जाती। छात्रों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हमारा आंदोलन टकराव के लिए नहीं, भविष्य बचाने के लिए है- छात्र

कलेक्टोरेट में शिकायत पत्र सौंपने के बाद छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद प्रशासन से टकराव मोल लेना नहीं, बल्कि अपने भविष्य और पढ़ाई को बचाना है। मौके पर पहुंचे तहसीलदार अमित सिंह को ज्ञापन सौंपने के बाद पदयात्रा भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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