इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बिना किसी चुनावी या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बोर्ड को भंग कर रातों-रात नया पुनर्गठन करने के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव सहित सभी संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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बिना वैधानिक प्रक्रिया रात 1 बजे हस्ताक्षर करने का गंभीर आरोप

सिवनी निवासी शोहेब खान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगल पीठ के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य रखे गए। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि 3 जुलाई को वक्फ बोर्ड को अचानक भंग किया गया और अगले ही दिन यानी 4 जुलाई को नया पुनर्गठन नोटिस जारी कर दिया गया।

यही नहीं पुनर्गठन संबंधी आदेश पर सामान्य कार्य समय की बजाय रात के 1 बजे हस्ताक्षर किए गए जो प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वहीं आरोप है कि पुनर्गठन के दौरान किसी भी चुनावी, वैधानिक या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और मनमाने ढंग से बोर्ड का गठन कर दिया गया।

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एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच ने मांगा जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

अदालत ने राज्य शासन, मुख्य सचिव और वक्फ बोर्ड से जुड़े अधिकारियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है।

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