MP Weather Update: संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते कई जिलों में बारिश का दौर तेज हो गया है। डिंडोरी, पन्ना, रीवा, सतना और छतरपुर समेत कई इलाकों में भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ जलप्रपात भी उफान पर हैं। मंडला में नर्मदा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है, जबकि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच चुका है। कई स्थानों पर जलभराव के कारण सड़क मार्ग से आवाजाही प्रभावित हुई है।

शुक्रवार को निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगले 24 घंटे में इन इलाकों में 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। इसके साथ ही ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

जलभराव से बढ़ी परेशानी

लगातार हो रही बारिश का असर चित्रकूट में भी देखने को मिल रहा है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पानी बाजार क्षेत्र तक पहुंच गया है। सड़कों पर पानी भरने की वजह से नावों की मदद लेनी पड़ी। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को बंद कर दिया गया है। वहीं रीवा में भी जलभराव ने परेशानी बढ़ा दी है। निराला नगर छात्रावास सहित करीब नौ इलाकों में पानी भर गया। कई घरों और दुकानों में रखा सामान भी बारिश के पानी की चपेट में आ गया।

नदियां उफान पर

सतना की कई बस्तियों और कॉलोनियों में बारिश का पानी घुसने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डिंडोरी में खरमेर नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी पुल के ऊपर से बहने लगा। इसके चलते डिंडोरी-मंडला स्टेट हाईवे पर यातायात बंद करना पड़ा। मंडला में भी नर्मदा का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है और छोटा पुल पानी में डूब चुका है। मऊगंज में अष्टभुजा नदी के उफान ने स्थिति बिगाड़ दी है। नईगढ़ी गांव में नदी का पानी कई घरों में प्रवेश कर गया है।

जबलपुर में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बरगी बांध के 13 गेट खोल दिए गए हैं। बांध से पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। खजुराहो का रनेह जलप्रपात भी तेज बहाव के साथ उफान पर है। पन्ना के बृहस्पति कुंड में भी पानी लगातार बढ़ रहा है। नर्मदा का जलस्तर बढ़ने से जबलपुर के धुआंधार जलप्रपात का सामान्य स्वरूप भी अब नजर नहीं आ रहा है।

आज इन जिलों में बारिश की चेतावनी

शुक्रवार को निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की चेतावनी है। वहीं भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

अब तक इतनी बारिश

मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, मानसून की द्रोणिका सहित कई मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं, जिसके चलते पूर्वी मध्य प्रदेश में फिलहाल तेज बारिश हो रही है। 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे प्रदेश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों की तरफ बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। प्रदेश में अब तक कुल 599 मिलीमीटर यानी 23.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। जबकि इस अवधि तक सामान्य बारिश का आंकड़ा 675.1 मिलीमीटर यानी 26.6 इंच होना चाहिए था। इस हिसाब से मध्य प्रदेश में अभी भी सामान्य से करीब 3 इंच यानी 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी 11 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत बनी हुई है।

कहां कितना गिरा पानी?

पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में बारिश सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में सामान्य की तुलना में 4 से 58 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 5 से 39 प्रतिशत तक कम पानी गिरा है।

यहां सामान्य से ज्यादा बारिश

इसके उलट भोपाल, ग्वालियर, अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, गुना, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। यानी जून महीने में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई अच्छी बारिश से स्थिति में कुछ सुधार आया, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक लगने से कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं। अब अगस्त में एक बार फिर मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय हुई है, जिसके चलते बारिश का दौर तेज हुआ है। जुलाई का बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, लेकिन जून में हुई बारिश की कमी की पूरी भरपाई अभी तक नहीं हो पाई है। पूरे मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन करीब 37.3 इंच बारिश होती है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के आसपास रहता है।

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