कुमार इंदर, जबलपुर। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुए ‘चढ़ावा चोरी’ को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। विपक्ष एक तरफ सवालों के तीर छोड़ रहा है तो दूसरी तरफ सत्ता में मौजूद सरकार जांच प्रक्रिया और कार्रवाई के नाम को ढाल बनाकर बचने की जुगत कर रही है। इस बीच मध्य प्रदेश से भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, मध्य प्रदेश की अयोध्या के नाम से चर्चित राजा राम सरकार मंदिर में भी कैश और आभूषण की चोरी हुई थी।
चंदा चोरी कांड का अब तक सुराग नहीं
मामला साल 2017 का है जब निवाड़ी जिला बनने के पहले अविभाजित टीकमगढ़ जिले में चंदे और गहनों में हेरा फेरी का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ था। जहां बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा के विश्व प्रसिद्ध श्री रामराजा सरकार मंदिर से कैश और आभूषण गायब हुआ था। चंदा चोरी कांड का अब तक सुराग नहीं लग पाया है। इस मामले में आरोपी बनाए गए मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने दर्ज FIR को रद्द किया था।
मंदिर की चल अचल संपत्तियों में वित्तीय अनियमिताओं का आरोप
श्री राम राजा सरकार मंदिर के खातों, दान राशि, आभूषणों, नगद बही खातों, स्टॉक रजिस्टर और मंदिर की चल अचल संपत्तियों में वित्तीय अनियमिताओं का आरोप लगाते हुए धारा 420 के तहत मुकदमा कायम किया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने फैसला दिया था।
फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर रही सरकार
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था- “आपराधिक कानून किसी नागरिक के सिर पर अनिश्चितकाल तक लटकी तलवार नहीं बन सकता” प्रशासनिक कठिनाइयां, अधिकारियों के तबादले, सेवानिवृत्ति या दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया किसी भी हाल में लगभग एक दशक तक विवेचना लंबित करने का औचित्य नहीं बन सकती। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले त्वरित और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है।” मध्यप्रदेश सरकार एमपी हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर रही है।

