नवादा। बिहार की राजनीति में जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर चल रही उठापटक के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व नवादा जिलाध्यक्ष मुकेश विद्यार्थी ने अपने प्रदेश सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र औपचारिक रूप से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को सौंप दिया है।
लंबी सेवा के बाद पद से दूरी
मुकेश विद्यार्थी का जदयू के साथ जुड़ाव काफी पुराना और गहरा रहा है। अपने इस्तीफे में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि वे बीते कई वर्षों से संगठन के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी में प्रदेश महासचिव, संगठन मंत्री, जिला प्रभारी, लोकसभा प्रभारी और प्रमंडल प्रभारी जैसे चुनौतीपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं।
विद्यार्थी ने स्पष्ट किया कि हाल ही में घोषित प्रदेश कमेटी में उन्हें प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार किया था, लेकिन अब वे निजी कारणों से इस पद को छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को भी इसकी प्रति भेज दी है और प्रदेश अध्यक्ष से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का विनम्र आग्रह किया है।
नाराजगी की असली वजह क्या है?
भले ही आधिकारिक त्यागपत्र में मुकेश विद्यार्थी ने इस्तीफे के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जानकारों का मानना है कि नवादा जिला अध्यक्ष के चुनाव के दौरान पार्टी नेतृत्व द्वारा की गई अनदेखी से वे काफी आहत थे।
सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले विद्यार्थी को जिला अध्यक्ष के चुनाव में गुटबाजी का शिकार होना पड़ा। अपनी उपेक्षा से दुखी होकर ही उन्होंने यह कदम उठाया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे भले ही पद से इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन पार्टी के एक अनुशासित और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूत करने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
मुकेश विद्यार्थी का यह कदम जदयू के लिए एक संकेत है कि अनुभवी और पुराने नेताओं की नाराजगी आने वाले समय में संगठन के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस इस्तीफे को स्वीकार कर उन्हें कैसे मनाता है या उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।

