मुजफ्फरपुर। जिले में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बेनीबाद थाने में तैनात एक दारोगा, एक सिपाही और एक चौकीदार को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक वायरल ऑडियो और उसके आधार पर कराई गई उच्चस्तरीय जांच के बाद की गई है, जिसमें पुलिसकर्मियों द्वारा पैसों के लेन-देन कर आरोपियों को अवैध तरीके से छोड़े जाने का मामला सामने आया है।

​ऑडियो वायरल होने के बाद एक्शन

​मामले की शुरुआत तब हुई जब बेनीबाद थाने के कुछ पुलिसकर्मियों से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। इस ऑडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पूर्वी वन) को इसकी गुप्त और निष्पक्ष जांच सौंप दी। जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए, उसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

​आरोपियों को चुपचाप छोड़ा

​जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय ग्रामीणों ने कुछ आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। लेकिन बेनीबाद थाने के इन पुलिसकर्मियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए बिना किसी वरीय पदाधिकारी या थानाध्यक्ष को सूचना दिए उन आरोपियों को थाने से ही छोड़ दिया। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि यह पूरा खेल एक निजी व्यक्ति के माध्यम से हुए पैसों के लेन-देन के बाद किया गया। हैरानी की बात यह है कि वायरल ऑडियो में जिस निजी व्यक्ति का नाम बार-बार आ रहा है, वह खुद कई मामलों में चार्जशीटेड (आरोप पत्रित) अपराधी है।

​इन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

​जांच रिपोर्ट में ओडी पदाधिकारी के रूप में तैनात दारोगा मौर्यन दीपांकरण की संलिप्तता और संदिग्ध भूमिका सामने आई। इसके बाद एसएसपी ने कड़ा कदम उठाते हुए इन कर्मियों को निलंबित कर दिया:

  • ​दारोगा मौर्यन दीपांकरण (ओडी पदाधिकारी)
  • ​सिपाही सौरभ कुमार
  • ​ चौकीदार गुल्टेन कुमार

​एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इन सभी का कृत्य कर्तव्य के प्रति भारी लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और संदिग्ध आचरण को दर्शाता है। एक आदतन अपराधी और आरोप पत्रित अभियुक्त से इस तरह का संपर्क रखना पुलिस सेवा की गरिमा और कर्तव्यनिष्ठा के पूरी तरह खिलाफ है।

​थानाध्यक्ष से मांगा गया स्पष्टीकरण

​इस पूरे प्रकरण में नवनियुक्त थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार सिंह, जिन्होंने हाल ही में 14 अगस्त को ही इस थाने में योगदान दिया था, उनकी सीधी संलिप्तता जांच में सामने नहीं आई है। हालांकि, अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं रख पाने और प्रशासनिक चूक के लिए थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस कड़ी कार्रवाई से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।