कुंदन कुमार/पटना/मुजफ्फरपुर। शहर के प्रसाद हॉस्पिटल में हाल ही में हुई दर्दनाक अग्निकांड की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस हादसे के बाद अब जिम्मेदारियों के निर्धारण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जन स्वास्थ्य कल्याण समिति के सचिव डॉ. एल.बी. सिंह ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और शॉर्ट सर्किट का खतरा
डॉ. एल.बी. सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि इस अग्निकांड के पीछे अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल परिसर में बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि अस्पताल में बिजली सुरक्षा के लिए आवश्यक एमसीबी तक स्थापित नहीं किए गए थे। डॉ. सिंह के अनुसार इसी तकनीकी खामी के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने अनौपचारिक रूप से शॉर्ट सर्किट की बात को स्वीकार भी किया है।
निरीक्षण प्रक्रिया पर उठते सवाल
डॉ. सिंह ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि बिना आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के इस अस्पताल को संचालन की अनुमति कैसे दी गई? उन्होंने कहा कि अस्पताल का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों और संबंधित सिविल सर्जन की भूमिका अत्यंत संदिग्ध है। यदि अस्पताल के पास एनओसी (NOC) या फायर सेफ्टी का क्लीयरेंस नहीं था, तो आखिर उसे लाइसेंस किसने दिया? यह पूरी प्रक्रिया मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
सिविल सर्जन पर कार्रवाई की मांग
इस मामले में केवल अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। डॉ. सिंह ने राज्य सरकार से मांग की है कि मामले की गहन जांच कर सबसे पहले मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे अस्पताल गलत तरीके से लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हैं जबकि निगरानी तंत्र पूरी तरह उदासीन बना रहता है। डॉ. सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो ऐसी दुखद घटनाएं होती रहेंगी और निर्दोष मरीजों की जान जाती रहेगी। सरकार को अब इस मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करनी होगी।

