मुजफ्फरपुर। तिरहुत प्रमंडल के निजी स्कूलों द्वारा नामांकन और फीस के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर ‘व्यापार’ और नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने अब नियमों का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक दंड और मान्यता रद्द करने जैसे कड़े प्रावधान लागू कर दिए हैं।
समीक्षा बैठक में सख्त हिदायत
आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में तिरहुत प्रमंडल के छह जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और अभिभावक संघों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना था। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जमीन पर उतरकर स्कूलों की कार्यप्रणाली और उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करें।
फीस वृद्धि की ‘लक्ष्मण रेखा’ तय
आयुक्त ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी निजी विद्यालय एक शैक्षणिक सत्र में 7 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अक्सर स्कूल ‘विकास शुल्क’ और ‘वार्षिक शुल्क’ जैसे गुप्त मदों के जरिए मोटी रकम वसूलते हैं, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है। अब स्कूलों को अपने फीस स्ट्रक्चर और बैलेंस शीट को पारदर्शी रखना होगा।
भारी जुर्माना और कड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने पहली बार उल्लंघन करने वाले स्कूलों के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया है। यदि इसके बाद भी सुधार नहीं होता और स्कूल दोबारा दोषी पाया जाता है, तो जुर्माने की राशि 2 लाख रुपये कर दी जाएगी। लगातार अवहेलना करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा करने का भी सख्त निर्देश दिया गया है।
अभिभावकों को मिली बड़ी राहत
इस निर्णय से मुजफ्फरपुर सहित पूरे प्रमंडल के लाखों अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। DEO को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि अभिभावक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। आयुक्त के इस कदम का अभिभावक संघों ने पुरजोर स्वागत किया है, इसे निजी स्कूलों की बेलगाम मनमानी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
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