हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के एमवाय अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ऐसे युवक की मूत्रनली (यूरेथ्रा) का सफल पुनर्निर्माण किया है, जिसकी यूरेथ्रा सड़क दुर्घटना में पूरी तरह नष्ट हो गई थी। यह जटिल सर्जरी “एंटेरो यूरेथ्रोप्लास्टी” तकनीक से की गई, जिसे मध्य प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में पहली बार सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है।

ढाई साल पहले दुर्घटना का हुआ था शिकार

डॉक्टरों के अनुसार, युवक करीब ढाई साल पहले एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था। हादसे में उसकी मूत्रनली पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना के बाद उसने कई अस्पतालों में इलाज कराया और अलग-अलग चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से गुजरा, लेकिन उसे सामान्य रूप से मूत्र त्याग करने में सफलता नहीं मिली। वह लंबे समय से सुपराप्यूबिक कैथेटर (एसपीसी) के सहारे जीवन व्यतीत कर रहा था। बाद में मरीज एमवाय अस्पताल पहुंचा, जहां विशेषज्ञों की टीम ने उसकी विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया।

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इस तकनीक से हुई सफल सर्जरी

जांच के बाद डॉक्टरों ने एंटेरो यूरेथ्रोप्लास्टी तकनीक से यूरेथ्रा का पुनर्निर्माण करने का फैसला लिया। इस तकनीक में आंत के एक हिस्से को उसके रक्त प्रवाह के साथ सुरक्षित निकालकर मूत्रनली के क्षतिग्रस्त हिस्से की जगह प्रत्यारोपित किया जाता है, जिससे मूत्र का सामान्य मार्ग दोबारा स्थापित किया जा सके। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, यह सर्जरी अत्यंत जटिल और उच्च विशेषज्ञता वाली मानी जाती है और गंभीर चोटों या लंबी यूरेथ्रल क्षति वाले मरीजों के लिए अंतिम विकल्प के रूप में उपयोग की जाती है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति बेहतर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है।

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एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घंघोरिया के मार्गदर्शन में यह ऑपरेशन एमवाय अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने किया। एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी जैन और उनकी टीम ने भी इस सफल ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से भविष्य में प्रदेश के गंभीर मरीजों को जटिल यूरोलॉजिकल सर्जरी के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और उन्हें बेहतर उपचार स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा।

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