वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के सिलाव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मितमा गांव में दो समुदायों के बीच आपसी तनाव ने हिंसक झड़प का रूप ले लिया। शुक्रवार की सुबह हुई इस खूनी संघर्ष में दोनों पक्षों की ओर से जमकर ईंट-पत्थर चले और ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है और स्थानीय लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए।
इस पूरे खूनी संघर्ष की जड़ें दो दिन पहले आयोजित हुई आषाढ़ी पूजा के दौरान उपजे विवाद से जुड़ी हैं। पूजा के अवसर पर दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी, जो बाद में मारपीट और तोड़फोड़ में बदल गई थी। इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से सिलाव थाने में अलग-अलग प्राथमिकियां (FIR) भी दर्ज कराई गई थीं। पुलिस इस मामले में कोई ठोस निवारक कदम उठाती, उससे पहले ही शुक्रवार की सुबह यह पुरानी रंजिश फिर से भड़क उठी।
शुक्रवार की सुबह हुई खूनी झड़प और घायलों की स्थिति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह एक पक्ष के लोगों द्वारा दुकानों और घरों में तोड़फोड़ करने का गंभीर आरोप लगाया गया। इसके तुरंत बाद दूसरे पक्ष ने भी जवाबी हमला कर दिया, जिससे बात पूरी तरह हाथ से निकल गई। देखते ही देखते मामूली कहासुनी एक बड़े युद्ध में बदल गई, जहां दोनों तरफ से पथराव के साथ-साथ अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं।
इस भीषण गोलीबारी और पथराव के दौरान कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक युवक की गर्दन को चीरती हुई गोली निकल गई, जिससे वह बाल-बाल बच गया और उसकी जान एक बड़े हादसे में बची। अन्य घायलों में से एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए वीआईएमएस (VIMS) पावापुरी रेफर कर दिया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस का सख्त पहरा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। राजगीर डीएसपी संजीत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सिलाव सहित कुल चार थानों की पुलिस तुरंत भारी बल के साथ मितमा गांव पहुंची। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्थिति पर काबू पाया और गांव में फ्लैग मार्च निकाला ताकि जनता में सुरक्षा का विश्वास बहाल किया जा सके।
तलाशी के दौरान घटनास्थल से पुलिस ने एक जिंदा/खाली खोखा भी बरामद किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक कुल पांच संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि मुख्य उपद्रवियों की पहचान की जा सके।
मंत्रियों और शासन का कड़ा संदेश
इस अप्रिय घटना की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार स्वयं मितमा गांव पहुंचे और मौके का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से बातचीत की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस उपद्रव के पीछे जो भी दोषी पाया जाए, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
वर्तमान में मितमा गांव को पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव में भारी मात्रा में अतिरिक्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या दोबारा हिंसा को समय रहते रोका जा सके।


