नालंदा। जिले में निर्माण कार्य में गुणवत्ता से खिलवाड़ का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिहारशरीफ-कतरीसराय मुख्य मार्ग पर स्थित सकरी नदी पर बना पुल महज 10 वर्षों के भीतर ही जर्जर होकर धंस गया है। इस घटना ने न केवल निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि हजारों लोगों की आवाजाही को भी ठप कर दिया है।
पुल के फाउंडेशन में आई दरार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुल के फाउंडेशन के नीचे से मिट्टी खिसकने के कारण कई पिलर (पायों) में खतरनाक झुकाव आ गया है। पुल की कैपिंग के लोहे के छड़ बाहर निकल आए हैं, जो इसके जर्जर होने की पुष्टि करते हैं। किसी भी संभावित बड़े हादसे को टालने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं। गुरुवार को पुल के दोनों सिरों पर ईंट की पक्की दीवार खड़ी कर दी गई है, जिससे वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया है।
एनआईटी की रिपोर्ट और खतरनाक घोषित पुल
हाल ही में एनआईटी (NIT) और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की संयुक्त तकनीकी टीम ने पुल का मुआयना किया था। अपनी जांच रिपोर्ट में टीम ने इस संरचना को अत्यंत खतरनाक घोषित करते हुए इसे तत्काल बंद करने और इसके स्थान पर नए पुल के निर्माण की सिफारिश की है। इसी तकनीकी रिपोर्ट को आधार बनाकर सुरक्षा कारणों से इस महत्वपूर्ण लाइफलाइन को बंद करने का निर्णय लिया गया।
हजारों की आबादी प्रभावित, व्यापार पर असर
यह पुल नालंदा के पूर्वी हिस्से और शेखपुरा के पश्चिमी इलाके के बीच सीधा संपर्क सूत्र था। इसके बंद होने से गिरियक से शेखपुरा और बरबीघा आने-जाने वाले हजारों लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी राजीव पांडेय, धर्मेंद्र सिंह और विकास कुमार का कहना है कि यह पुल व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी की रीढ़ था। अब राहगीरों को शाहपुर होते हुए मीलों का अतिरिक्त चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
ग्रामीणों का आक्रोश और घटिया निर्माण का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और निर्माण विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि मात्र एक दशक के भीतर ही पुल ढहने की कगार पर पहुंच गया है।
सुरक्षा के बावजूद जान जोखिम में डाल रहे लोग
हालात की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। हालांकि, इसके बावजूद कई मोटरसाइकिल सवार प्रशासन द्वारा बनाई गई ईंट की दीवार फांदकर जान जोखिम में डाल रहे हैं। बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) क्रिसलय श्रीवास्तव ने स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले 48 घंटों के भीतर नदी में एक वैकल्पिक डायवर्सन (कच्चा रास्ता) तैयार कर लिया जाएगा, ताकि लोगों को राहत मिल सके और यातायात फिर से सुचारू हो सके।

