Naresh Meena Surrender: राजस्थान के चर्चित समरावता हिंसा मामले में आरोपी नरेश मीणा ने गुरुवार को नगरफोर्ट थाने में सरेंडर कर दिया। पिछले महीने हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द होने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें टोंक स्थित एससी-एसटी कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। इस दौरान कोर्ट परिसर के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद रहे, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

नगरफोर्ट थाने में किया आत्मसमर्पण
हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा गुरुवार को नगरफोर्ट थाने पहुंचे और सरेंडर किया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें एससी-एसटी कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद न्यायालय ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
वकील ने कोर्ट की कार्यवाही पर उठाए सवाल
सुनवाई के बाद नरेश मीणा के अधिवक्ता फतेह मीणा ने अदालत की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मामले में एकपक्षीय सुनवाई की गई और बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से याचिका प्रस्तुत करने की तैयारी थी, लेकिन उसे प्रभावी ढंग से रखने का मौका नहीं दिया गया।
पिछले महीने रद्द हुई थी जमानत
टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को नरेश मीणा की हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द कर दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि जमानत जिन शर्तों पर दी गई थी, उनका पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर जमानत निरस्त करते हुए गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था।
उपचुनाव के दौरान हुई थी हिंसा
यह मामला नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। मतदान के दिन नरेश मीणा पर एसडीएम को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था। इसके बाद समरावता गांव में हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
कोर्ट परिसर बना पुलिस छावनी
नरेश मीणा की पेशी को देखते हुए कोर्ट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और समर्थकों की मौजूदगी के बीच पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
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