दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। देश भर में इन दिनों पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना और इसके फायदों की चर्चा जोरों पर है। इसी कड़ी में नर्मदापुरम जिले के पवारखेड़ा स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य गन्ना अनुसंधान केंद्र में गन्ने की उन्नत किस्मों पर विशेष रिसर्च की जा रही है। इस शोध का सीधा मकसद किसानों और शक्कर कारखानों दोनों को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाना है।

ये भी पढ़ें: राज्यों की जंग में अटका करोड़ों का सोलर प्लांट! MP-राजस्थान सीमा विवाद पहुंचा SC, पेयजल और सस्ती बिजली पर संकट

शर्करा और सुक्रोज बढ़ाने पर विशेष जोर

गन्ना अनुसंधान केंद्र के मुख्य रिसर्चर ऑस्कर टोप्पो के अनुसार, वर्तमान में केंद्र में ऐसी नई तकनीकों और किस्मों पर शोध चल रहा है जिससे गन्ने में शर्करा और सुक्रोज की मात्रा को अधिकतम किया जा सके। अलग-अलग गन्ने की किस्मों में अलग-अलग गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता होती है। यदि गन्ने में शर्करा का प्रतिशत अधिक होगा तो इससे चीनी मिलों को बेहतर रिकवरी मिलेगी और किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

एथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मुख्य लक्ष्य देश में कच्चे तेल के आयात और खपत को कम करना है। इसके लिए पेट्रोल में एथेनॉल का सम्मिश्रण लगातार बढ़ाया जा रहा है। पवारखेड़ा में चल रही रिसर्च से गन्ने से अधिक मात्रा में एथेनॉल प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।

ये भी पढ़ें: जहरीला कीड़ा काटने पर दी बीपी-शुगर की दवा! मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

​गन्ने के बगास से बनेगी बिजली और प्लाईवुड

रिसर्चर ऑस्कर टोप्पो ने बताया कि गन्ने का उपयोग केवल चीनी और रस तक सीमित नहीं है बल्कि इसके उप-उत्पाद भी बेहद उपयोगी हैं। रस निकालने के बाद जो वेस्ट बचता है, जिसे बगास यानि खोई कहा जाता है, उससे फैक्ट्रियां बिजली उत्पादन का काम कर रही हैं। इसके अलावा इस बगास का उपयोग प्लाई, प्लाईवुड और कई अन्य औद्योगिक सामान बनाने में भी व्यापक रूप से हो रहा है। ​वैज्ञानिकों का मानना है कि गन्ने की पूरी फसल और उसके अवशेषों का सही उपयोग करके किसान अपनी उत्पादन क्षमता और आय में कई गुना बढ़ोतरी कर सकते हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m