रवि रायकवार, दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया में उप चुनाव के लिए प्रत्याशियों के ऐलान के बाद सियासी पारा हाई हो गया है। एक तरफ नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश बरकरार है। वहीं कांग्रेस ने भी इस सीट को बचाने के लिए दम लगाना शुरू कर दिया है। इसी चुनावी मौसम के बीच नरोत्तम मिश्रा ने ऐसा बयान दे दिया जिससे भाजपा में एक बार फिर हलचल मच गई है।
‘मेरी टिकट काटने की क्षमता आशुतोष में नहीं’
दरअसल, नरोत्तम मिश्रा ने हाल ही में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए वोट की अपील की थी। इस दौरान उनके आंसू छलक पड़े थे और टिकट कटने पर उनका दर्द खुलकर सामने आ गया था। अब उन्होंने
भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने भरे मंच से कहा, ‘उपचुनाव में उनकी टिकट काटने की क्षमता भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी में नहीं है। टिकट काटने वाले कोई और हैं। वहां तक तुम्हारे जाने की क्षमता नहीं है। वहां हम बात करेंगे और तुम्हें पता है कि ठहरेंगे नहीं।’
मंच पर आंसू आने की बताई वजह
आंदोलन के दौरान उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई FIR पर भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि निर्दोष को पीटना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।
नरोत्तम मिश्रा ने मंच पर फफक कर रोने की वजह का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मुकेश कमरिया के सिर पर आंसू गैस का गोला फट गया और उसके बाल चले गए।ये देखकर मन विफल हो गया मंच पर उस दिशा में बढ़ गए। कार्यकर्ताओं की हालत देखकर मंच पर आंसू आ गए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि ब्रह्मास्त्र गलत जगह पर मत दागो।
‘एसपी साहब… मैं दोस्ती और दुश्मनी दोनों याद रखता हूं’
नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों पर हुई कार्रवाई के बाद दतिया एसपी को मंच से खुली चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा, ‘एसपी साहब में दोस्ती और दुश्मनी दोनों याद रखता हूं। मैं भूलने वाला प्राणी नहीं याद रखने वाला प्राणी हूं।
गौरतलब है कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। बीजेपी ने जहां नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर नए चेहरे पर भरोसा जताया और आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने दो बार विधायक रहे दतिया राजघराने के मुखिया घनश्याम सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है।
कौन हैं घनश्याम सिंह?
घनश्याम सिंह दतिया राजघराने के मुखिया हैं। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जूदेव 1984 में भिंड-दतिया सीट से कांग्रेस के टिकट से सांसद बने थे। पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए दतिया विधानसभा से 1993 में घनश्याम सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर पहला चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1998 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया लेकिन 2003 में दोबारा उन्हें दतिया की जिम्मेदारी दी। इस बार उन्होंने अपना दबदबा दिखाया और जीतकर विधायक बने।
कौन है आशुतोष तिवारी ?
दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी बने आशुतोष तिवारी संगठन के कद्दावर नेता हैं। वर्तमान में वह बीजेपी के प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी के पद पर हैं। साथ ही भाजपा प्रदेश कार्य समिति के सक्रिय सदस्य हैं। आशुतोष मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वह ग्वालियर, भोपाल संभाग के संगठन मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
कब-क्या होगा?
दतिया में 13 जुलाई से नामांकन था और 14 जुलाई को नामांकन की स्क्रूटनी हुई। 16 जुलाई को नाम वापसी की आखिरी तारीख है। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना है।
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