काजल,हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजविप्रौवि), हिसार में ‘स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी: जीन से औषधि खोज तक’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थियों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में कुलपति के तकनीकी सलाहकार प्रो. संदीप राणा मुख्य अतिथि रहे, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. आलोक चंद्र भारती ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
एएनआरएफ-PEER परियोजना के तहत हो रहा आयोजन
यह कार्यशाला एएनआरएफ-PEER (त्वरित नवाचार एवं अनुसंधान के लिए साझेदारी) परियोजना के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर जैव-चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (ACBR), जैव-सूचना विज्ञान अवसंरचना सुविधा (BIF) और प्राणी विज्ञान विभाग की आणविक ऑन्कोलॉजी प्रयोगशाला के सहयोग से किया जा रहा है। इस कार्यशाला की मेजबानी गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कर रहा है।
मानव जीवन को बेहतर बनाने में अनुसंधान की अहम भूमिका
मुख्य अतिथि प्रो. संदीप राणा ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल नई तकनीकों का विकास करना नहीं, बल्कि मानव जीवन को अधिक स्वस्थ और बेहतर बनाना भी है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से समाजोपयोगी और नवाचार आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।
संस्थागत सहयोग से बढ़ेगी वैज्ञानिक क्षमता
मुख्य वक्ता प्रो. आलोक चंद्र भारती ने एएनआरएफ-PEER परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थानों के बीच सहयोग, संसाधनों की साझेदारी और बहुविषयक अनुसंधान भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित कर नवाचार को बढ़ावा दे रही है।
AI और बायोइन्फॉर्मेटिक्स से होगी नई दवाओं की खोज
उद्घाटन तकनीकी व्याख्यान में प्रो. मधु चोपड़ा ने आधुनिक औषधि खोज में कंप्यूटर-सहायित ड्रग डिजाइन, आणविक मॉडलिंग, वर्चुअल स्क्रीनिंग, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, नेटवर्क फार्माकोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रतिभागियों को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण
दो दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों को जैव-सूचना विज्ञान, संगणकीय औषधि खोज, स्तनधारी कोशिका संवर्धन और ऑक्सफोर्ड नैनोपोर दीर्घ-पठन अनुक्रमण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य जैव-चिकित्सा अनुसंधान और अनुप्रयुक्त विज्ञान के क्षेत्र में शोध क्षमता को मजबूत करना तथा संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में प्रो. अश्वनी कुमार, प्रो. मुनीष आहुजा, प्रो. सुमित्रा सिंह, प्रो. दिनेश ढींगड़ा, प्रो. सुनील शर्मा, प्रो. अर्चना कपूर, प्रो. सुनील कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. रेखा राव, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. समृद्धि और डॉ. कविता सहित अनेक शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया। समापन अवसर पर डॉ. विक्रमजीत सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

