पटना। ​बिहार में आगामी विकास लक्ष्यों और संगठनात्मक मजबूती को लेकर एनडीए ने कमर कस ली है। हाल ही में आयोजित एनडीए की संयुक्त बैठक में नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना अब प्राथमिकता है।

​जमीनी स्तर पर सक्रिय होगी सरकार और संगठन

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सख्त लहजे में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त के बाद वे स्वयं जिलों का दौरा करेंगे और जमीनी हकीकत परखने के लिए वहां नाइट स्टे (रात्रि विश्राम) करेंगे। नीतीश कुमार ने जोर दिया कि सरकार और संगठन के बीच हर तीन महीने में संवाद सुनिश्चित होगा ताकि बेहतर समन्वय बना रहे।

​जनहित के बड़े फैसले और वित्तीय बोझ

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग और राज्य सरकार के जनहित के निर्णयों से खजाने पर 9,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आया है। इन फैसलों में पेंशन राशि को 400 से बढ़ाकर 1100 रुपये करना, महिलाओं के लिए विशेष रोजगार योजनाएं और घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना प्रमुख है।

​प्रमुख विकास लक्ष्य और नए कार्यक्रम

सरकार ने राज्य के विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की रूपरेखा तय की है:

  • ​मेडिकल कॉलेज: मार्च 2027 तक सभी जिलों में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू होगा।
  • ​राशन कार्ड: एक करोड़ नए परिवारों के राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
  • ​सौर ऊर्जा: सभी घरों को सोलर पैनल से जोड़ने का लक्ष्य है, जिसमें कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  • ​शिकायत निवारण: हर महीने ब्लॉक स्तर पर दो दिन सहयोग शिविर एक दिन राज्य शिविर 10 तारीख को पेंशन दिवस और महीने के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस मनाया जाएगा।

​गवर्नेंस और मोदी का चेहरा

यह बैठक एनडीए की भविष्य की रणनीति को स्पष्ट करती है। नीतीश कुमार के पुराने गवर्नेंस मॉडल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय योजनाओं का कॉम्बो बनाकर गठबंधन सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। कार्यकर्ताओं को नए राशन कार्ड और सोलर योजना में शामिल कर उन्हें जनता के बीच सक्रिय किया जा रहा है। साथ ही, अफसरशाही पर लगाम लगाने और एंटी-इंकंबेंसी को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री का जिलों में जाकर सीधा फीडबैक लेना एक बड़ी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।