सोहराब आलम/ मोतिहारी। देशव्यापी नीट (NEET) पेपर लीक मामले की परतें अब बिहार के सुदूर इलाकों तक पहुंच चुकी हैं। दिल्ली से संतोष जायसवाल की गिरफ्तारी ने पूर्वी चंपारण समेत पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। घोड़ासहन प्रखंड के लैन गांव का रहने वाला संतोष, जो कभी एक सामान्य पृष्ठभूमि से आता था, आज देश की सबसे बड़ी परीक्षा धांधली के आरोपियों में शामिल है।
साधारण शुरुआत और असाधारण रसूख
संतोष जायसवाल के परिवार का सफर संघर्षपूर्ण रहा है। उसके पिता, गोपाल प्रसाद जायसवाल, स्थानीय सिनेमा हॉल में ऑपरेटर के रूप में कार्य करते थे। हालांकि, संतोष ने बहुत कम समय में आर्थिक और राजनीतिक सीढ़ियां चढ़नी शुरू कर दीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में संतोष की जीवनशैली और प्रभाव में जो उछाल आया, वह चौंकाने वाला था। उसकी मैनेजमेंट और सेटिंग की चर्चाएं अक्सर दबी जुबान में होती रहती थीं।
राजद में बढ़ता कद और चुनावी महात्वाकांक्षा
राजनीति के मैदान में संतोष ने अपनी पैठ काफी गहरी कर ली थी। वह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में राष्ट्रीय सचिव के पद तक पहुंचा। बड़े नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें और पार्टी के मुख्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी उसके बढ़ते रसूख का प्रमाण थीं। चर्चा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उसने रक्सौल सीट से ताल ठोकने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन गठबंधन के समीकरणों के चलते उसे टिकट नहीं मिल सका।
मेडिकल नेटवर्क और पारिवारिक जड़ें
जांच में यह भी सामने आया है कि संतोष का परिवार मेडिकल क्षेत्र से गहराई से जुड़ा है। उसके दो भाई दिल्ली-एनसीआर में अस्पताल संचालित करते हैं। वहीं, उसका एक भाई डॉ. राजन जायसवाल भी राजनीति में सक्रिय है और ढाका विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुका है। परिवार के इसी मेडिकल बैकग्राउंड और राजनीतिक रसूख ने उसे एक ऐसा नेटवर्क बनाने में मदद की, जो कथित तौर पर प्रश्नपत्रों की हेराफेरी तक जा पहुंचा।
संतोष की गिरफ्तारी ने न केवल उसके गांव लैन के लोगों को हैरान किया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी सरकार और सिस्टम पर हमला करने का मौका दे दिया है। सवाल यह है कि एक छोटे से गांव का युवक इतने बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का हिस्सा कैसे बना? फिलहाल, पटना से दिल्ली तक इस मामले की गूंज है और अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

