NEET पेपर लीक मामले के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर एनटीए को भंग करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत बनाई गई है, उसे खत्म कर संसद के कानून के जरिए एक नई वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाई जानी चाहिए।
NEET पेपर लीक विवाद के बीच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर NTA को भंग करने और संसद के कानून से नई वैधानिक परीक्षा एजेंसी बनाने की मांग की है।
नीट पेपर लीक के बाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में एनटीए को खत्म करने की मांग उठी है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के बाद, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने नीट एग्जाम में ‘सिस्टेमैटिक फेलियर’ बताते हुए एनटीए को भंग करने की मांग वाली याचिका दायर की है।
नीट पेपर लीक और एग्जाम कैंसिल होने के बाद देशभर में एनटीए के खिलाफ गुस्सा देखने को मिल रहा है। 2021, 2024 और अब 2026 में फिर से नीट परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं और अभिभावकों में नाराजगी का महौला है।
अंडग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) 2026 के संचालन में कथित सिस्टमैटिक फेलियर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दूसरी याचिका दायर की गई है। याचिका में नीट एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मौजूदा स्वरूप को भंग करने की मांग की गई है।
FAIMA ने कोर्ट से नीट एग्जाम के लिए हाई-लेवल कमेटी नियुक्त करने की गुहार लगाई। वकील तन्वी दुबे ने कहा, ‘हमने यह भी गुहार लगाई है कि अदालत (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा एक हाई-लेवल कमेटी नियुक्त की जाए, जो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के कामकाज पर नजर रखे, और यह सुनिश्चित करे कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। इस तरह की व्यवस्थागत विफलताएं दोबारा न हों।’
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को उसके मौजूदा स्वरूप में भंग करने की मांग की है। यह मांग कथित विवाद और उसके बाद परीक्षा रद्द होने के चलते की गई है। यह याचिका यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) नामक एक पंजीकृत संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि NEET-UG 2026 के आयोजन में ‘सिस्टेमैटिक और कैट्रोफिक फेलियर’ हुआ है। साथ ही एग्जाम सिस्टम में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म की मांग गई है।
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