नेपाल में भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. वहीं, काठमांडू सरकार ने पहले विदेशी राहत टीमों को राहत और सहायता के लिए मना कर दिया था. अब नेपाली सरकार ने अपने फैसले पर यू टर्न लेते हुए भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के एक्सपर्ट्स की सीमित मदद लेने की बात कही है. सरकार का कहना है कि उन्होंने कभी भी विदेशी सहायता लेने से इनकार नहीं किया.
नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विदेशी मदद को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे. कहा जा रहा था कि नेपाली सरकार ने विदेशी मदद से इनकार कर दिया है.
विदेशी मदद को लेकर नेपाल ने बाढ़ से तबाही के बाद अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने को मंजूरी दे दी है. काठमांडू सरकार ने पहले विदेशी राहत टीमों को राहत और सहायता के लिए मना कर दिया था. वहीं, बालेन शाह ने अब इस फैसले को पलट दिया है.
नेपाल में बुधवार को आई भयंकर बाढ़ से देश की सेना और बचाव दलों पर बोझ बेतहाशा बढ़ा गया है. नेपाल के लिए बिना विदेशी मदद के इस संकट से निकलना मुश्किल हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अब नेपाल सरकार सीमित विदेशी विशेषज्ञों और खोज-बचाव टीमों को अनुमति दे रही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि नेपाल के अनुरोध पर भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर रहा है. पहले एक सर्वे टीम भेजी जा रही है, जो स्थिति का आकलन करेगी और जरूरी उपकरणों की पहचान करेगी.
विदेशी टीमों को टनल रेस्क्यू, DNA जांच और शवों की पहचान के लिए लगाया जाएगा. इसके अलावा चिकित्सा टीम भी भेजी जा रही है.
नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में 579 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं. इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं.
नेपाल सरकार ने साफ किया है कि मुश्किल हालात में वह अंतरराष्ट्रीय मदद लेने के लिए तैयार है. खासकर ऐसे मामलों में जहां विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत हो, वहां विदेशी टीमों की मदद ली जा सकती है.
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