कुंदन कुमार, पटना। बिहार सरकार में मंत्री और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने आज एमएलसी चुनाव के अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन का आज सोमवार (8 जून) को आखिरी दिन था। आज अंतिम दिन ही एनडीए के सभी 9 और महागठबंधन के एक सभी 10 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन भरा। नामांकन दाखिल करने के बाद निशांत कुमार ने कहा कि, मुझे जो दायित्व मिला है, मैं उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाऊंगा।
पिता का सपना पूरा करना उद्देश्य
निशांत कुमार ने कहा कि, मेरे पिता नीतीश कुमार ने विकसित बिहार, समृद्ध बिहार का जो सपना देखा है कि बिहार और बेहतर हो और विकसित हो बिहार की युवाओं को रोजगार मिले, उसे पूरा करने की कोशिश हम करेंगे। करूंगा। निशांत ने साफ-साफ कहा कि नीतीश के सपना को पूरा करना ही हमारा उद्देश्य है।
जदयू सांसद संजय झा का बयान
निशांत कुमार के नामांकन दाखिल करते समय विधानमंडल में जदयू नेता संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मौजूद थे। निशांत के नामांकन दाखिल करने पर जदयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि, निशांत का नामांकन हुआ है और अभी ये सरकार में भी काम कर रहे हैं। अब ये पार्टी का भी काम देखेंगे। इन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। विकसित बिहार बनाने का हमारा सपना है और हम उसे पूरा करेंगे।
ललन सिंह ने जताई निर्विरोध चुनाव की आशंका
वहीं, मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा कि, नीतीश कुमार हमेशा इस बात के पक्ष में रहे हैं कि जिसका जो संख्या बल है उसी के आधार पर उम्मीदवार बनाया जाए। नीतीश कुमार ने कभी राज्य सभा और विधान परिषद के चुनाव में मतदान को असंभव करने का प्रयास नहीं किया। इस बार भी ऐसा लगता है नामांकन के मुताबिक चुनाव निर्विरोध होगा।
सम्राट सरकार में निशांत ने ली मंत्री पद की शपथ
गौरतलब है कि पूर्व सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे देने के बाद, जब सम्राट चौधरी की नई सरकार का गठन हुआ तो निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली। मंत्री पद की शपथ लेते समय निशांत कुमार किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। ऐसे में नियमों के मुताबिक 6 महीने के अंदर उनका किसी न किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी था। इसी बात को ही ध्यान में रखते हुए निशांत कुमार को जदयू से एमएलसी पद का उम्मीदवार बनाया गया है।
खतरे में दीपक प्रकाश की मंत्री पद
बिहार सरकार में निशांत कुमार के अलावा दीपक प्रकाश भी एक ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने 2025 चुनाव के बाद नीतीश और सम्राट दोनों ही सरकार में बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए मंत्री पद की शपथ ली है। हालांकि इस एमएलसी चुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया है, ऐसे में अब उनके मंत्री पद पर संकट के बादल दिखने लगे हैं। उधर लगातार बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए मंत्री पद की शपथ लेने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
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