कुंदन कुमार, पटना। भाजपा हर साल की तरह इस साल भी 25 जून को संविधान हत्या दिवस (काला दिवस) के रूप में मना रही है। देश भर में भाजपा के सभी मंडल कार्यालयों में पार्टी की ओर से आपातकाल की 51वीं बरसी को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है।

‘अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश को बनाया बंधक’

नितिन नबीन ने आपातकाल की 51वीं बरसी पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किया था। इसके बाद राष्ट्रहित नहीं, बल्कि सत्ता हित को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि, एक व्यक्ति की कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश की स्वतंत्रता को बंधक बना लिया गया और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने का प्रयास किया गया।

हाजारों लोकतंत्र सेनानियों को जेल में डाला

लोकतंत्र की आवाज़ उठाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी, लालकृष्ण आडवाणी जी सहित हजारों लोकतंत्र सेनानियों को जेलों में डाल दिया गया। प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई, जबरन नसबंदी अभियान चलाए गए, मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए और MISA जैसे कानूनों के माध्यम से नागरिक स्वतंत्रताओं का दमन किया गया। यह केवल राजनीतिक संकट नहीं, लोकतंत्र पर सीधा प्रहार था।

संविधान में किया गया कई संसोधन

सत्ता को निरंकुश बनाने के लिए संविधान में कई संशोधन किए गए। न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करने का प्रयास हुआ। लेकिन भारत की लोकतांत्रिक आत्मा को दबाया नहीं जा सका। कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के युवाओं और आम नागरिकों ने एकजुट होकर इस तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष किया और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।

PM मोदी ने भेष बदलकर घर-घर पहुंचाया संदेश

उसी संघर्ष के दौर में एक युवा प्रचारक के रूप में आदरणीय पीएम नरेंद्र मोदी ने गिरफ्तारी से बचते हुए, भेष बदलकर आंदोलन का संदेश घर-घर पहुंचाया। भारतीय जनसंघ ने राष्ट्रहित और लोकतंत्र की रक्षा को सर्वोपरि रखते हुए अपने व्यक्तिगत एवं संगठनात्मक हितों से ऊपर उठकर स्वयं को जनता पार्टी में विलीन कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हजारों स्वयंसेवकों ने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा का कार्य किया, जबकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्र शक्ति को संगठित कर जनजागरण का नेतृत्व किया। यह त्याग, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा भारतीय राजनीति का स्वर्णिम अध्याय है।

विपक्ष पर लगाया दोषारोपण राजनीति का आरोप

आज देश एक विचित्र विडंबना देख रहा है। जिन्होंने लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला किया, वही आज लोकतंत्र के सबसे बड़े स्वयंभू रक्षक बनने का प्रयास कर रहे हैं। जब चुनावों में जनता उन्हें नकार देती है, तब उन्हें चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं रहता। EVM पर सवाल उठाए जाते हैं। जब न्यायालयों के निर्णय उनके राजनीतिक हितों के अनुरूप नहीं होते, तब न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए जाते हैं। कांग्रेस की राजनीति आज जवाबदेही की नहीं, बल्कि दोषारोपण की राजनीति बनकर रह गई है।

कांग्रेस को मांगनी चाहिए बिना शर्त माफी

संसद नहीं चले तो दोष सरकार का, चुनाव हार जाएं तो दोष व्यवस्था का, जनता समर्थन न दे तो दोष संस्थाओं का। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जो दल आज संविधान की दुहाई देता है, उसने आज तक आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी क्यों नहीं मांगी? यदि सचमुच संविधान की चिंता होती, तो सबसे पहले लोकतंत्र की हत्या के उस अपराध के लिए देश से क्षमा मांगी जाती।

देश की सामूहिक स्मृति से मिटाने का प्रयास

दशकों तक आपातकाल के इस काले अध्याय को देश की सामूहिक स्मृति से मिटाने का प्रयास किया गया। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और संविधान पर हुए इस प्रहार को इतिहास के हाशिये पर धकेल दिया गया। लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लेकर इतिहास के साथ न्याय किया गया। संविधान हत्या दिवस हमें केवल अतीत की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह संकल्प भी कराता है कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम सभी को सदैव सजग और समर्पित रहना पड़ेगा।

ये भी पढ़ें- ‘दादी ने उड़ाईं संविधान की धज्जियां’, पोते से माफी की मांग, आपातकाल का जिक्र कर राहुल पर बरसे नड्डा