वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिला अंतर्गत नूरसराय अंदर बाजार के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के लिए जलजमाव अब एक नासूर बन चुका है। पिछले एक दशक से यहां के लोग इस नरकीय जीवन को जीने के लिए विवश हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि बाजार की मुख्य सड़क पर लगभग 500 मीटर के क्षेत्र में 3 फीट तक पानी जमा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पानी अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुकान और मकानों के अंदर तक घुस चुका है।
व्यापारियों का कहना है कि जल निकासी की पुरानी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पहले बारिश का पानी पटना-बिहार रोड के पूर्वी हिस्से से उत्तर दिशा की ओर बहते हुए गोडिहा पुल के रास्ते पश्चिम की तरफ पईन (जलमार्ग) में चला जाता था। परंतु, समय के साथ नाले और पईन के अतिक्रमण तथा बंद हो जाने के कारण पानी के निकलने का सारा रास्ता अवरुद्ध हो गया है।

रोजी-रोटी का संकट और डीएम से गुहार
नूरसराय बाजार व्यवसाय संघ के अनुसार, इस जलजमाव की चपेट में 500 से अधिक दुकानें और आवासीय प्रतिष्ठान आ चुके हैं। बाजार में पानी भरे होने के कारण ग्राहकों ने आना बिल्कुल बंद कर दिया है, जिससे दुकानदारों के सामने भुखमरी और रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इस विकट परिस्थिति से त्रस्त होकर व्यवसाय संघ के सदस्यों ने नालंदा के जिला पदाधिकारी (DM) को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द पानी की निकासी की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
महामारी की आहट और प्रशासन की जिम्मेदारी
स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस बात की भी गहरी चिंता है कि (जमा पानी) के कारण स्वास्थ्य आपातकाल पैदा हो सकता है। पूर्व में भी इसी क्षेत्र में डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी अपना प्रकोप दिखा चुकी है। ऐसे में महीनों तक पानी भरा रहने से जानलेवा बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
व्यापारियों ने मांग की है कि प्रशासन बिना किसी देरी के नाले और पईन की उड़ाही (सफाई) का कार्य शुरू करे। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या से नूरसराय बाजार को कब तक निजात दिला पाता है।


