बारडोली (गुजरात): साइबर अपराध का एक बेहद दिल दहला देने वाला और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका और लंदन में 40 वर्षों तक कड़ी मेहनत करके जीवनभर की कमाई जोड़ने वाले 82 वर्षीय NRI बुजुर्ग परशुरामभाई नानुभाई पटेल साइबर ठगों के जाल में फंस गए। शातिर साइबर अपराधियों ने उन्हें मुंबई पुलिस के फर्जी वारंट और मुंबई हाईकोर्ट के फर्जी मुहर-सिक्के का डर दिखाकर लगातार 23 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और उनसे कुल 2.96 करोड़ रुपये ठग लिए।
8 अगस्त से शुरू हुआ खौफ का खेल
बारडोली की श्याम पार्क सोसायटी में अपनी पत्नी दमयंतीबेन के साथ रह रहे परशुरामभाई को 8 अगस्त को ‘मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर’ के नाम से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल पर पहले एक महिला और बाद में खुद को DSP अनिल कुमार बताने वाले व्यक्ति ने बात की। साइबर ठगों ने उन पर आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड से सितेश रहेजा नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर 122 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। बुजुर्ग द्वारा इनकार करने पर ठगों ने सितेश रहेजा की गिरफ्तारी की फोटो और उनके नाम का कथित डेबिट कार्ड भेजा। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की फर्जी सील-सिक्का और 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर बना फर्जी अरेस्ट वारंट भेजकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोषित कर दिया।
घर के बाहर लोग, हमले और जेल की दी धमकियां
ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति को डराने के लिए तरह-तरह के दबाव बनाए:
- घर पर नजर का डर: ठगों ने कहा कि 24 घंटे उनके घर के बाहर आदमी तैनात हैं, बाहर निकलने पर पता चल जाएगा।
- पत्नी को जेल भेजने की धमकी: अगर खाते की पूरी जानकारी नहीं दी और कोड नहीं भेजा, तो पत्नी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा।
- हर दो घंटे में रिपोर्टिंग: बुजुर्ग को हर दो घंटे में व्हाट्सएप पर “I AM SAFE” का मैसेज भेजने के लिए मजबूर किया गया।
5 चरणों में ट्रांसफर करवाए 2.96 करोड़ रुपये
आरबीआई (RBI) वेरिफिकेशन के नाम पर ठगों ने बुजुर्ग से अलग-अलग बैंकों के खातों में 5 बार में कुल ₹2.96 करोड़ रुपये RTGS के जरिए ट्रांसफर करवाए:
- 11 अगस्त 2026: ₹52,50,000 (इंडसइंड बैंक, सिकंदराबाद)
- 13 अगस्त 2026: ₹21,50,000 (कैथोलिक सीरियन बैंक, मुंबई)
- 19 अगस्त 2026: ₹92,50,000 (ICICI बैंक, नरोदा)
- 20 अगस्त 2026: ₹90,00,000 (ICICI बैंक, नरोदा)
- 21 अगस्त 2026: ₹39,50,000 (एक्सिस बैंक, बड़ौदा)
बैंक मैनेजर की सतर्कता से बची और बड़ी रकम
30 और 31 अगस्त को ठगों ने बुजुर्ग की पत्नी की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाने की कोशिश की। जब बुजुर्ग SBI की टाउन हॉल शाखा पहुंचे, तो बैंक मैनेजर को संदेह हुआ। पूछताछ करने पर बैंक मैनेजर ने FD तोड़ने से मना कर दिया और बताया कि वे ‘डिजिटल फ्रॉड’ का शिकार हुए हैं। मैनेजर ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कराया और बारडोली पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद PI बी.ए. डांगी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस और कानून की चेतावनी
भारतीय कानूनी प्रावधानों में व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने का कोई नियम नहीं है। सीबीआई, ईडी, पुलिस या कोर्ट कभी भी व्यक्तिगत खातों में पैसा ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहते। अज्ञात नंबर से धमकी या फर्जी वारंट आए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और बैंक खाते फ्रीज कराएं।
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