नूंह के वन स्टॉप सेंटर में रह रही एक पीड़िता ने सेंटर के चौकीदार पर दुष्कर्म और काउंसलर पर साजिश में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के बाद नूंह शहर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सोनू वर्मा, नूंह। महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए बनाए गए वन स्टॉप सेंटर पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब हाईकोर्ट के आदेश पर यहां रह रही एक महिला ने सेंटर के चौकीदार पर दुष्कर्म और काउंसलर पर साजिश में साथ देने का आरोप लगाया। पीड़िता की शिकायत के बाद नूंह शहर थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चौकीदार और काउंसलर पर गंभीर आरोप
पुलिस के अनुसार, पीड़िता को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए नूंह के वन स्टॉप सेंटर में रखा गया था। आरोप है कि सेंटर में तैनात चौकीदार सरवर लगातार उस पर गलत नजर रखता था और मौका मिलते ही उसके साथ अशोभनीय हरकतें करता था। पीड़िता ने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सेंटर में काउंसलर के पद पर तैनात चौकीदार की भांजी भी इस मामले में शामिल हैं। महिला के बेसुध होने के बाद चौकीदार ने उसके साथ दुष्कर्म किया। होश आने पर जब पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपी ने उसके पति और पिता को जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने का दबाव बनाया।
शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
पीड़िता का कहना है कि उसने इस पूरे मामले की शिकायत जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) और सीएम ग्राम पोर्टल पर भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार उसने पूरी घटना अपने पति को बताई, जिसके बाद पति ने नूंह शहर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने बृहस्पतिवार को मामला दर्ज कर लिया।
पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके बयान भी दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 68, 64(2), 123 और 351(2) सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जांच अधिकारी का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना इसलिए भी बेहद चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं और बच्चियों के लिए बनाए गए हैं, जिन्हें हिंसा, उत्पीड़न या खतरे से बचाकर सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाता है। यदि ऐसे संस्थानों में ही सुरक्षा पर सवाल उठने लगें तो पीड़ित महिलाओं और बच्चियों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जगह को अदालतें सुरक्षित आश्रय मानकर पीड़िताओं को भेजती हैं, यदि वहीं उनकी अस्मिता खतरे में पड़ जाए तो सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? इस सनसनीखेज मामले ने न केवल वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली बल्कि वहां की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पूरे मामले पर प्रशासन और महिला सुरक्षा तंत्र की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।


