भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने ‘वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन नियम (DFPR), 1978’ में संशोधन करके अधिकारियों की वित्तीय शक्तियों को बढ़ा दिया है। इसका उद्देश्य परियोजनाओं और योजनाओं के कार्यान्वयन में अधिक पारदर्शिता लाना और उन्हें तेज़ी से लागू करना है।
वित्त विभाग द्वारा जारी संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, कई ऐसी स्वीकृतियाँ जिनके लिए पहले कैबिनेट या मंत्रियों से मंज़ूरी लेनी पड़ती थी, अब विभागीय स्तर पर ही दी जा सकती हैं। इस कदम से देरी कम होने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।

नए नियमों के तहत, विभागीय सचिवों को आकस्मिक व्यय (contingent expenditure) पर पूर्ण अधिकार दिए गए हैं। अब विभागों के प्रमुख 10 करोड़ रुपये तक के खरीद प्रस्तावों को मंज़ूरी दे सकते हैं, जबकि सचिव 20 करोड़ रुपये तक की खरीद को मंज़ूर कर सकते हैं। ज़िला कलेक्टरों को भी स्थानीय परियोजनाओं के लिए, उच्च स्तर से मंज़ूरी का इंतज़ार किए बिना, धनराशि स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है।
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