ब्रह्मपुर। वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता पीतवास पांडा हत्याकांड में जमानत पर रिहा हुए बीजू जनता दल के गंजम जिला अध्यक्ष और ब्रह्मपुर के पूर्व विधायक बिक्रम कुमार पांडा की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। जेल में रहते हुए हत्याकांड के एक मुख्य गवाह को फोन कर कथित तौर पर धमकाने के मामले में पुलिस ने बिक्रम पांडा के खिलाफ नया आपराधिक मामला दर्ज किया है। इस मामले में उनके सहयोगी और सह-आरोपी मदन दलेई तथा ब्रह्मपुर मंडल कारागार के एक डॉक्टर को भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस के अनुसार, पीतवास पांडा हत्याकांड के प्रमुख गवाह ललित मोहन मंगराज ने गोसानीनुआगांव थाने में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 28 अगस्त 2026 को जब बिक्रम पांडा ब्रह्मपुर सर्कल जेल में विचाराधीन कैदी के तौर पर बंद थे, तब उन्होंने मदन दलेई के साथ मिलकर जेल के डॉक्टर के केबिन का इस्तेमाल किया।
आरोप है कि डॉक्टर के मोबाइल फोन से ललित मोहन को कॉल किया गया और उन्हें गवाही नहीं देने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, गवाही देने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई थी।
CCTV और कॉल डिटेल से खुला मामला
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। ब्रह्मपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. सरवण विवेक एम. के मुताबिक, जांच के दौरान जेल के डॉक्टर कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसके अलावा संबंधित मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया गया।
पुलिस का कहना है कि जांच में गवाह की ओर से लगाए गए आरोपों की काफी हद तक पुष्टि हुई है। इसके बाद बिक्रम पांडा, मदन दलेई और संबंधित जेल डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
डॉक्टर की भूमिका पर भी कार्रवाई
एसपी डॉ. सरवण विवेक एम. ने कहा कि जेल परिसर में किसी कैदी को फोन उपलब्ध कराना और उसके जरिए किसी गवाह को धमकाने में मदद करना गंभीर अपराध है। पुलिस जांच में जेल डॉक्टर की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
क्या है पीतवास पांडा हत्याकांड?
ब्रह्मपुर में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भाजपा नेता पीतवास पांडा की 6 अक्टूबर 2025 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में 6 नवंबर 2025 को बिक्रम कुमार पांडा, पूर्व मेयर शिवशंकर दास समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
बिक्रम पांडा दस महीने से अधिक समय तक जेल में रहे। इसके बाद ओडिशा हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने पर उन्हें 1 सितंबर 2026 को जेल से रिहा किया गया था।
अब जेल में रहते हुए मुख्य गवाह को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में नया केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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