ODISHA DESK, कटक: ओडिशा उच्च न्यायालय ने बुधवार को उत्कल विश्वविद्यालय में छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए ‘लोकपाल’ (Ombudsman) की नियुक्ति न किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव (Registrar) को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमन की खंडपीठ ने भुवनेश्वर के मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता प्रबीर कुमार दास द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिका के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘छात्र शिकायत निवारण विनियम, 2021’ के तहत हर विश्वविद्यालय में एक लोकपाल की नियुक्ति अनिवार्य है। यह नियम 11 अप्रैल, 2023 से लागू हो चुका है। यूजीसी के निर्देशों के मुताबिक, अधिसूचना के 30 दिनों के भीतर इस पद को भरा जाना चाहिए था, लेकिन उत्कल विश्वविद्यालय में दो साल बाद भी यह पद रिक्त है।
अधिवक्ता प्रबीर दास ने कोर्ट को बताया कि लोकपाल के साथ-साथ छात्र शिकायत निवारण समिति (SGRC) का गठन भी अनिवार्य है। नियमों के तहत, लोकपाल के पद पर किसी सेवानिवृत्त कुलपति, पूर्व जिला न्यायाधीश या 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त प्रोफेसर को नियुक्त किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने बताया कि मार्च 2024 में कुलपति को पत्र लिखने और अक्टूबर 2024 में आरटीआई (RTI) दायर करने पर विश्वविद्यालय ने केवल इतना जवाब दिया कि नियुक्ति “सक्रिय विचाराधीन” है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तारीख तय की है।
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