भुवनेश्वर: ओडिशा के सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में भारी कमियों और त्रुटियों को लेकर मचे बवाल के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. इसी सिलसिले में राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.

SIT कर रही है पूरे मामले की जांच

क्राइम ब्रांच के डीएसपी के नेतृत्व में गठित एक विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है. टीम पाठ्यपुस्तकों के लेखन, सामग्री चयन, मंजूरी, छपाई और वितरण की पूरी प्रक्रिया को खंगाल रही है. इस सिलसिले में जरूरी दस्तावेज, फाइलें और संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

हजारों त्रुटियां: कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में लगभग 1,678 गंभीर तथ्यात्मक, वर्तनी और व्याकरण संबंधी गलतियां पाई गई थीं. उदाहरण के लिए, एक किताब में ओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियों को पड़ोसी राज्य झारखंड में दिखा दिया गया था.

साजिश की आशंका: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे सरकार को बदनाम करने की एक बड़ी साजिश होने का संदेह जताया था. इसके बाद उन्होंने मामले की एफआईआर दर्ज कराकर विस्तृत जांच के आदेश दिए थे.

बड़ी कार्रवाई: इससे पहले विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित किया जा चुका है. साथ ही छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की गई है.

बदली जाएंगी किताबें: सरकार ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सभी त्रुटिपूर्ण पुस्तकों को वापस लेने और उनकी जगह नई त्रुटिहीन पुस्तकें छापने का निर्णय लिया है. साथ ही भविष्य के लिए एक ‘क्वालिटी एश्योरेंस सेल’ (गुणवत्ता आश्वासन सेल) के गठन को मंजूरी दी है.

पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी से चल रही इस पूछताछ के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि पाठ्यपुस्तक छपाई के इस बड़े खेल में शामिल कई अन्य चेहरों और गड़बड़ी की वजहों का जल्द ही पर्दाफाश होगा.