राकेश चतुर्वेदी, Bhopal. खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में नर्मदा किनारे स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चर्चा है कि इस महा-परियोजना के मुख्य पिलर में गंभीर तकनीकी खामी आ गई है और वह एक तरफ झुक गया है। सुरक्षा और तकनीकी मानकों की अनदेखी का यह मामला इस कदर गरमा गया है कि इसकी गूंज अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है और मामले की शिकायत देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) तक पहुंचने की खबरें आ रही हैं।

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पिलर का स्ट्रेस रेशियो खतरे के निशान के पार!

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिमा के मुख्य पिलर पर पड़ने वाले दबाव और तकनीकी इंजीनियरिंग को लेकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। चर्चा है कि पिलर का स्ट्रेस रेशियो 0.85 से बढ़कर 1.244 तक पहुंच चुका है।

तकनीकी भाषा में स्ट्रेस रेशियो का इस कदर बढ़ना सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि पिलर प्रतिमा के विशालकाय वजन और दबाव को संभालने में असमर्थ साबित हो रहा है। ऐसे में निर्माण के दौरान सुरक्षा और तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी किए जाने की बात सामने आ रही है।

2300 करोड़ की परियोजना पर उठे गंभीर सवाल

इस भव्य प्रतिमा और पूरे एकात्मधाम प्रोजेक्ट पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है लेकिन पहली ही बड़ी तकनीकी रिपोर्ट ने पूरे कामकाज की पोल खोलकर रख दी है। आदिगुरु शंकराचार्य की इस भव्य प्रतिमा के निर्माण पर करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च आया है।

अगर पूरे एकात्मधाम परिसर की बात करें, तो यह पूरी परियोजना लगभग 2300 करोड़ रुपये की है। इतने भारी-भरकम बजट और देश-विदेश के बड़े इंजीनियरों की देखरेख में बने इस स्ट्रक्चर में इतनी बड़ी चूक होना अपने आप में भ्रष्टाचार और लापरवाही के बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है।

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तेज हवाएं झेलने का दावा… अब खुद के वजन से खतरा?

हैरानी की बात यह है कि जब इस प्रतिमा का डिजाइन तैयार किया गया था, तब बड़े-बड़े दावे किए गए थे। इंजीनियर्स के मुताबिक यह प्रतिमा 140 से 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी और तेज हवाओं को भी आसानी से झेलने के हिसाब से डिजाइन की गई थी। लेकिन अब जो आंतरिक रिपोर्ट और चर्चाएं बाहर आ रही हैं, उनके अनुसार प्रतिमा बाहरी तूफान तो दूर, अपने खुद के पिलर के असंतुलन के कारण बड़े खतरे की जद में आ गई है।

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