इमरान खान, खंडवा। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों और तोड़फोड़ से प्रभावित स्थानीय लोग अब पूरी तरह लामबंद हो गए हैं। प्रशासन द्वारा मकान और दुकानें तोड़े जाने तथा उचित मुआवजे व पुनर्वास पर सहमति न बनने के विरोध में नगरवासियों ने सोमवार से दो दिवसीय अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान कर दिया है। स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर किए गए इस बंद का असर पहले ही दिन से पूरे शहर में व्यापक रूप से दिखाई दिया।
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होटल, दुकानें, नावें और ऑटो रहे पूरी तरह बंद
बंद के आह्वान के बाद ओंकारेश्वर में स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों, गेस्ट हाउस संचालकों, नाविकों और ऑटो चालकों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखकर इस आंदोलन को समर्थन दिया। स्थिति यह रही कि आम दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दुकानों की चहल-पहल और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाली तीर्थनगरी में सन्नाटा पसरा नजर आया। बस स्टैंड से लेकर मंदिर तक बाजार बंद रहने के कारण दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को भगवान को अर्पित करने के लिए फूल और प्रसाद तक की दुकानें बंद मिलीं, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों की मांग और पर्यटकों की प्रतिक्रिया
आंदोलन कर रहे स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन सिंहस्थ के नाम पर उनके आशियानों और रोजी-रोटी का जरिया बनी दुकानों को तोड़ रहा है। उनकी मांग है कि जिनके भी मकान या दुकानें तोड़ी जा रही हैं, उन्हें “दुकान के बदले दुकान, मकान के बदले मकान” और उचित मुआवजा दिया जाए।
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वहीं, इस अचानक बंद के कारण बाहर से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं को खासी परेशानी उठानी पड़ी। दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर पहुंचीं श्रद्धालु साईं दीपा ने कहा कि तीर्थनगरी में ऐसा माहौल देखकर अच्छा नहीं लगा, सरकार को स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। वहीं दिल्ली से ही आए आकाश गर्ग ने बताया कि प्रसाद की दुकानें बंद होने के कारण उन्हें भगवान को चढ़ाने के लिए प्रसाद तक नहीं मिल सका। श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन जल्द ही स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का उचित समाधान निकालेगा ताकि कारोबार और धार्मिक यात्राएं सुचारू हो सकें।

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