हूती लड़ाकों के हमले के बाद सऊदी अरब बड़े संकट का का अकेले सामना कर रहा है, ऐसे में मक्का रक्षा समझौते की धज्जियां उड़ गयी. सऊदी अरब के पारंपरिक सहयोगी पाकिस्तान ने यमन में सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार किया है. जिसके बाद यमन में हूती लड़ाकों के हमले के बाद सऊदी अरब ने अमेरिका के जरिए इजरायल से खुफिया मदद मांगी है. तब जाकर बेशर्म पाकिस्तान की नींद टूटी और माहौल को देखते हुए पैंतरा बदला. जिसके बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान आया.
ख्वाजा आसिफ ने मक्का डिफेंस अलायंस का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक-दूसरे की रक्षा करने का ‘दुनियावी समझौता’ हर हालात में लागू रहेगा.
पाकिस्तान ने कहा है कि मक्का पर हमला होता है तो उसकी रक्षा के लिए किसी समझौते की जरूरत नहीं है. मुसलमान उसकी रक्षा के लिए पहले से ही प्रतिबद्ध है. मौकापरस्त होना और पैंतरा बदलना किसे कहते है, ये सब पाकिस्तान से बढ़िया कोई और नहीं सीखा सकता है क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान ने कहा था कि मक्का पैक्ट पुरानी लड़ाइयों पर लागू नहीं होगा.
गुरुवार को पाकिस्तान ने कहा कि वह मक्का रक्षा समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह बयान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है. इससे पहले बुधवार को मीडिया से बात करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान मक्का समझौते के तहत अपना फर्ज निभाएगा.
वहीं, ख्वाजा आसिफ़ ने कहा कि हूती और सऊदी अरब के बीच चल रहे टकराव में ईरान का किसी एक पक्ष का साथ देना समझदारी भरा कदम नहीं होगा, खासकर तेहरान के दूसरे देशों के साथ रिश्तों को देखते हुए.
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान उस वक्त आया है जब सऊदी पर हूती विद्रोहियों के हमले हो रहे हैं और मक्का पैक्ट के बाद भी पाकिस्तान और तुर्की मदद के लिए नहीं पहुंचे हैं.
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