सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से जारी हालिया अधिसूचना, जिसके तहत अन्य राज्यों में पंजीकृत चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों और पैरामेडिकल स्टाफ को बिना किसी अतिरिक्त अनुमोदन के छत्तीसगढ़ में चिकित्सा व्यवसाय करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसका प्रदेश के चिकित्सक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। चिकित्सक संगठनों का कहना है कि यह निर्णय प्रदेश के चिकित्सक समुदाय के हितों के विरुद्ध एक चिंताजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) एवं जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) इस अधिसूचना का कड़ा विरोध करते हैं। प्रदेश के हजारों युवा चिकित्सक, इंटर्न, जूनियर डॉक्टर एवं मेडिकल छात्र पहले से ही सीमित रोजगार अवसरों, रिक्त पदों पर भर्ती में विलंब तथा सेवा संबंधी अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में बाहरी राज्यों के चिकित्सकों के लिए बिना किसी स्थानीय नियामक प्रक्रिया के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करना राज्य के चिकित्सकों के भविष्य के साथ अन्याय है।
संगठनों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने के लिए सबसे पहले प्रदेश के युवाओं और स्थानीय चिकित्सकों को पर्याप्त अवसर, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। सरकार को रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, पदोन्नति और चिकित्सकों की कार्य परिस्थितियों में सुधार पर ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसी नीतियां लागू करनी चाहिए जिनसे स्थानीय चिकित्सकों में असुरक्षा की भावना पैदा करें।

CGDF और JDA ने मांग की है कि उक्त अधिसूचना पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए तथा चिकित्सक संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
डॉ. रेशम सिंह और डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि यदि चिकित्सक समुदाय को अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन, विरोध-प्रदर्शन अथवा हड़ताल जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और राज्य शासन की होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन भी किया जाएगा।
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