दिल्ली में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने एक सड़क दुर्घटना मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2024 में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले साइकिल चालक के परिवार को 22.91 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला साइकिल चालक सुशील कुमार की मौत से जुड़ा है, जिनके परिजनों ने मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई पीठासीन अधिकारी अनुराग दास द्वारा की गई। जानकारी के अनुसार, सुशील कुमार की मौत 18 दिसंबर 2024 को दिल्ली के रणहोला स्थित चंचल पार्क इलाके में हुई थी, जब उनकी साइकिल की टक्कर एक मोटरसाइकिल से हो गई थी।

9 जून को दिए अपने आदेश में ट्रिब्यूनल ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में सफल रहे हैं कि सुशील कुमार की मौत मोटरसाइकिल चालक राजीव की लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई थी। इसी लापरवाही के चलते हादसा हुआ और उन्हें गंभीर चोटें आईं। मामले में सामने आया कि टक्कर के बाद सुशील कुमार को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मोटरसाइकिल चालक के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था। ट्रिब्यूनल ने प्रत्यक्षदर्शी की गवाही, पुलिस रिकॉर्ड, FIR, चार्जशीट, साइट प्लान और मैकेनिकल निरीक्षण रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करने के बाद यह माना कि दुर्घटना लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई थी। आदेश में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि मोटरसाइकिल की टक्कर से ही सुशील कुमार को गंभीर चोटें आईं, जो उनकी मौत का कारण बनीं।

क्या बोल ट्रिब्यूनल

ट्रिब्यूनल ने माना कि हादसा मोटरसाइकिल चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण हुआ। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर भी भरोसा जताया, जो घटनास्थल के पास साइकिल मरम्मत की दुकान चलाता है। गवाह ने बयान दिया कि मोटरसाइकिल बहुत तेज गति से आ रही थी और यू-टर्न लेने के दौरान उसने साइकिल चालक को टक्कर मार दी। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि साइकिल चालक को टक्कर लगना इस बात का संकेत है कि वाहन तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाया जा रहा था। इसी आधार पर अदालत ने माना कि हादसे के लिए मोटरसाइकिल चालक जिम्मेदार था। ट्रिब्यूनल (MACT) ने मुआवजे की राशि तय करते समय मृतक की आय का आकलन दिल्ली में अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम वेतन के आधार पर किया। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल के सामने मृतक की आय से जुड़े कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे। ऐसे में अदालत ने उपलब्ध कानूनी प्रावधानों और न्यूनतम वेतन दरों को आधार बनाकर मुआवजे की गणना की। ट्रिब्यूनल ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद मृतक के परिजनों को कुल 22.91 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश जारी किया।

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