दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने लंदन में जजों और मंत्रियों के बैडमिंटन टूर्नामेंट (Badminton tournament) में हिस्सा लेने से जुड़ी एक कथित फर्जी वायरल रिपोर्ट के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (social media) को निर्देश दिया कि इस दावे से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री को हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि गलत जानकारी फैलाने वाली ऐसी सामग्री पर रोक जरूरी है। अदालत ने सोशल मीडिया कंपनियों को संबंधित सब्सक्राइबर की जानकारी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को मामले की कानून के अनुसार जांच करने को कहा गया है।
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने अपनी दलीलें रखीं। BAI की ओर से कहा गया कि सफाई दिए जाने के बावजूद फर्जी रिपोर्ट लगातार ऑनलाइन प्रसारित हो रही है, जिससे न्यायपालिका और खेल दोनों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप ने अदालत को बताया कि लंदन में जजों के बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की कथित फेक न्यूज तेजी से फैलाई गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलत जानकारी से न केवल न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि बैडमिंटन खेल की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह फेक न्यूज तेजी से फैल रही है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि उन्हें इस मामले से जुड़ी सामग्री पहले ही मिल गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मामले की फैक्ट चेकिंग कराई गई है और वायरल दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। सीनियर एडवोकेट अपूर्व कुरुप ने अदालत के सामने कई ऐसी पोस्ट और वीडियो का जिक्र किया, जिनमें दावा किया गया था कि जज और मंत्री उस कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वायरल सामग्री में बैडमिंटन जैसे खेल को गलत तरीके से एक नकारात्मक गतिविधि के रूप में पेश किया जा रहा है।
कुरुप ने कहा कि यह न्यायपालिका का अपमान है और एक नागरिक के तौर पर चिंता का विषय है। साथ ही इससे खेल की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है और बैडमिंटन का मजाक बनाया जा रहा है। सरकार की ओर से बताया गया कि सोशल मीडिया पर साझा की जा रही कुछ तस्वीरों में सूर्यकांत, विक्रम नाथ और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल व किरेन रिजिजू दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ये तस्वीरें 2025 की हैं और इन्हें गलत संदर्भ में प्रसारित किया जा रहा है।
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि संबंधित लोगों ने लंदन में किसी बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया था। उन्होंने बताया कि सूर्यकांत उस समय ब्रिटेन में थे, जहां उन्होंने यूके के चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी और कुछ आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। उन्होंने अदालत को बताया कि केंद्रीय मंत्री इस दौरान लंदन नहीं गए थे। साथ ही सोशल मीडिया पर किए जा रहे उस दावे को भी गलत बताया गया, जिसमें कहा गया था कि वहां 75 जज मौजूद थे। तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि फर्जी खबर शुरू किसने की। उन्होंने कहा कि अदालत इस संबंध में नोटिस जारी कर जांच के निर्देश दे सकती है।
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप ने अदालत से कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ स्पष्ट गाइडलाइन होनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में भी ऐसी भ्रामक खबरें दोबारा सामने आ सकती हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सोशल मीडिया पर यह दावा फैलाया जा रहा है कि सरकार 75 जजों को लंदन “मौज-मस्ती” के लिए ले गई थी। उन्होंने कहा कि आम लोग अक्सर लिखी हुई बातों पर विश्वास कर लेते हैं, इसलिए ऐसी फर्जी सूचनाओं के प्रसार को रोकना जरूरी है। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वह मामले में आदेश जारी करेगा।
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