कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह संयोजक सौरव दास (Saurav Das) को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने गौरव भाटिया (Gaurav Bhatia) के खिलाफ किए गए सभी पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने भाटिया की ओर से दायर मानहानि मुकदमे पर सुनवाई करते हुए CJP नेताओं को एक मौका देते हुए कहा कि वे खुद इन पोस्ट को हटा लें। सुनवाई के दौरान अदालत ने सीजेपी नेताओं को नसीहत भी दी। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सामग्री या आरोप को बिना उसके तथ्यों की जांच किए इस तरह सोशल मीडिया पर साझा करना उचित नहीं है। अदालत ने नेताओं को अपने स्तर पर पोस्ट हटाने का निर्देश देते हुए मामले में संयम बरतने की बात कही।

फर्जी न्यूज कार्ड शेयर करने का आरोप

मामला उस समय शुरू हुआ जब सौरव दास ने एक कथित फर्जी न्यूज कार्ड सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसमें गौरव भाटिया को गिरफ्तार किए गए विवादित यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हुए दिखाया गया था। भाटिया ने न्यूज कार्ड को फर्जी बताते हुए सौरव दास से पोस्ट हटाने और माफी मांगने को कहा था। सौरव दास ने बाद में वह पोस्ट डिलीट कर दिया, लेकिन माफी मांगने से इनकार कर दिया। इसके बजाय उन्होंने गौरव भाटिया की एक आपत्तिजनक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। इसी मामले को लेकर भाटिया ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और मानहानि का मुकदमा दायर किया।

2 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे पर हुई सुनवाई

भाजपा नेता गौरव भाटिया की ओर से दायर 2 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे पर जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सुनवाई की। अदालत ने कहा कि सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से गौरव भाटिया के खिलाफ बिना तथ्यों की जांच-पड़ताल किए किए गए पोस्ट उचित नहीं हैं। अदालत ने दोनों नेताओं को इन पोस्ट को खुद हटाने का मौका दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी सामग्री या आरोप की सत्यता की जांच किए बिना उसे सोशल मीडिया पर साझा करना सही नहीं है। वहीं, अभिजीत दीपके की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्होंने गौरव भाटिया के संबंध में कोई पोस्ट नहीं लिखा था। ऐसे में उनकी ओर से उन्हें मामले के प्रतिवादियों की सूची से हटाने का अनुरोध किया गया।

विरोध के कई तरीके, बिना पुष्टि के हमला ठीक नहीं

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सीजेपी नेताओं को मौखिक रूप से नसीहत भी दी। अदालत ने कहा कि विरोध जताने के कई तरीके होते हैं और युवा होने के नाते बेचैनी या असहमति स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन बिना किसी बात की पुष्टि किए इस तरह किसी पर हमला करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि सीजेपी नेता खुद पोस्ट हटाना चाहते हैं तो वे अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने संकेत दिया कि वह फिलहाल पोस्ट हटाने का सीधा आदेश जारी नहीं करना चाहती, बल्कि नेताओं को खुद इसे हटाने का अवसर देना चाहती है। सौरव दास के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित ट्वीट पहले ही डिलीट किया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने कहा कि उनके अकाउंट से कुछ और सामग्री भी पोस्ट की गई है। अदालत ने कहा कि सभी को अभिव्यक्ति का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल उचित तरीके से किया जाना चाहिए।

अदालत ने भाटिया से कहा- मामले से निपटने के और भी तरीके

सुनवाई के दौरान अदालत ने गौरव भाटिया से भी कहा कि इस तरह के मामलों से निपटने के दूसरे रास्ते भी हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि वह सीधे अदालत का रुख करने के बजाय संबंधित प्रतिवादियों से बातचीत कर सकते थे। इस पर गौरव भाटिया ने कहा कि यह गंभीर मानहानि का मामला है। उन्होंने अदालत से कहा कि इस तरह की पोस्ट इंटरनेट पर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि संबंधित लोगों के करोड़ों फॉलोअर्स हैं और ऐसी सामग्री से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है। भाटिया ने कहा कि उन्होंने पोस्ट हटाने और मामले को सुलझाने का मौका भी दिया था। अदालत ने इसके बाद सीजेपी नेताओं के वकीलों से कहा कि वे अपने मुवक्किलों से निर्देश लेकर बताएं कि वे विवादित पोस्ट को खुद हटाने के लिए तैयार हैं या नहीं।

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